हाईकोर्ट की ओर से केवल अनुमन्य सीटों पर दाखिले के आदेशों के बाद पैदा हुए दाखिला संकट को दूर करने के लिए उत्तराखंड सरकार सिर्फ खानापूर्ति कर रही है।
ईवनिंग क्लास के लिए गढ़वाल विवि से नहीं की बात
सरकार ने छात्रों को राहत देने के लिए ईवनिंग क्लास शुरू करने की घोषणा की है, लेकिन इस मसले पर गढ़वाल विवि से कोई बातचीत नहीं की गई है।
यह कक्षाएं कहां और किस मोड में चलेंगी, क्या फीस और शिक्षक कैसे आएंगे... इन सवालों का जवाब सरकार के पास नहीं है।
मंगलवार को सभी कॉलेजों के प्राचार्यों को जिलाधिकारी की ओर से एक पत्र मिला। पत्र में लिखा था कि ईवनिंग क्लास संचालित करने के लिए जल्द से जल्द कालेज के आसपास एसडीएम और प्राचार्य मिलकर खाली भवन तलाश लें।
अब यह कक्षाएं किस कोर्स की होंगी, पढ़ाने वाले कौन होंगे इसका कुछ पता नहीं है। खास बात यह है कि बीएससी की कक्षाएं चलाने के लिए लैब की जरूरत है।
दूसरी ओर, शासन ने महाविद्यालयों में इवनिंग क्लासेज शुरू करने का आदेश भी जारी कर दिया है, लेकिन इस बारे में भी अभी तक कोई ठोस पहल नहीं हुई है।
गढ़वाल विवि की अनुमति बिना इवनिंग कक्षाएं संचालित नहीं हो सकती, विवि से अब तक शासन ने कोई बातचीत नहीं की है। इवनिंग कक्षाओं में फीस, शिक्षक को लेकर भी असमंजस है।
कॉलेजों का हाल
डीएवी कॉलेज : 2008 में कॉलेज में ईवनिंग क्लास के लिए 3000 सीटें स्वीकृत हुई थीं। लेकिन, पांच हजार शुल्क पर छात्रों के विरोध के बाद मामला अटक गया।
इसके बाद न तो कॉलेज ने विवि को कभी सीट बढ़ाने के लिए पत्र भेजा और न ही सरकार ने कोई ऐसी पहल की। प्राचार्य. डॉ. देवेंद्र भसीन के मुताबिक कॉलेज में 12450 सीटों के हिसाब से 280 शिक्षकों होने चाहिए, लेकिन संख्या केवल 133 है।
उन्होंने कहा कि ईवनिंग क्लास का प्रस्ताव अच्छा है, लेकिन सरकार इसके लिए शुल्क और शिक्षकों का इंतजाम कराए।
डीबीएस कॉलेज : कॉलेज प्राचार्य डॉ. ओपी कुलश्रेष्ठ का दावा है कि वह कई बार गढ़वाल विवि को सीट बढ़ाने के लिए पत्र भेज चुके हैं।
गत वर्ष ईवनिंग कक्षाओं की बात सामने आई थी, लेकिन शासन से आदेश न मिलने के कारण यह मामला अटका हुआ है।
सरकार ने ईवनिंग क्लास संचालित करने का आदेश तो जारी किया है लेकिन यह कैसे, किस मोड में चलेंगी और पढ़ाने वाले शिक्षक कहां से आएंगे, इसका कुछ अता पता नहीं है।