शहर के प्राइवेट और कॉन्वेंट स्कूलों में 2016-17 सत्र के लिए एंट्री लेवल पर दाखिले की प्रक्रिया लगभग पूरी हो चुकी है।
अधिकतर प्राइवेट और कॉन्वेंट स्कूलों में लकी ड्रॉ लिस्ट में शामिल विद्यार्थियों की एडमिशन फीस जमा करने की प्रक्रिया पूरी कर ली गई है। अन्य स्कूल फरवरी के पहले हफ्ते में इसे पूरा कर लेंगे। शहर के टॉप प्राइवेट और कॉन्वेंट स्कूलों ने नोटिस बोर्ड पर सिर्फ एंट्री ही नहीं अन्य कक्षाओं में भी कोई सीट खाली न होने का नोटिस लगा दिया है। ऐसे में अभिभावकों के पास अब शहर के 107 सरकारी स्कूलों में ही बच्चों के दाखिले का विकल्प बचा है।
प्राइवेट और कॉन्वेंट स्कूलों के लकी ड्रॉ में असफल रहे अभिभावक अब सरकारी स्कूलों में आवेदन फॉर्म जमा करा रहे हैं। शिक्षा विभाग के अधिकारियों के अनुसार सरकारी स्कूलों में सीटें भरने तक आवेदन फॉर्म स्वीकार किए जाएंगे। शहर के सरकारी स्कूलों में एंट्री लेवल (प्री-नर्सरी और नर्सरी) की करीब सात हजार सीटों पर दाखिला दिया जाएगा।
ईडब्ल्यूएस सीटों का मांगा ब्योरा
यूटी प्रशासन ने 2016 सत्र में सभी प्राइवेट स्कूलों को 25 फीसदी सीटें ईडब्ल्यूएस कोटे के तहत भरने के आदेश दिए थे। लेकिन कई स्कूलों ने प्रशासन के आदेश नहीं माने। अभिभावकों की शिकायत पर अब प्रशासन ने सभी प्राइवेट स्कूलों से ईडब्ल्यूएस कोटे के तहत विद्यार्थियों से जुड़ा ब्योरा मांगा है। जिला शिक्षा अधिकारी की अगुवाई में एक टीम पूरे मामले की जांच कर रिपोर्ट डीपीआई (स्कूल) को देगी।
संपदा विभाग भी कार्रवाई को तैयार
प्राइवेट स्कूलों को प्रशासन ने रियायती दर पर जमीन अलॉट की है। ईडब्ल्यूएस कोटे पर दाखिला न देने वाले स्कूलों पर संपदा विभाग भी कार्रवाई की तैयारी में है। विभाग ने दो बार प्राइवेट स्कूलों के साथ ईडब्ल्यूएस कोटे की सीटें भरने को लेकर मीटिंग की जा चुकी है। प्रशासन ने इस बार नियमों की अनदेखी करने वाले स्कूलों पर सख्त कार्रवाई का फैसला लिया है। ऐसे स्कूलों की जमीन अलॉटमेंट भी रद्द की जा सकती है।
कोट्स
सभी प्राइवेट स्कूलों को एंट्री लेवल पर 25 फीसदी सीटें ईडब्ल्यूएस कोटे के तहत भरने के आदेश दिए गए हैं। कई स्कूलों की शिकायत आई है। विभाग सभी स्कूलों से ईडब्ल्यूएस कोटे का रिकॉर्ड तलब करेगा।
रुबिदरजीत सिंह बराड़, डीएसई यूटी।