हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के कर्मचारियों का आंदोलन वीरवार को सातवें दिन भी जारी रहा। कर्मचारियों ने संयुक्त समन्वय समिति (जेसीसी) के बैनर तले प्रशासनिक भवन के बाहर गेट मीटिंग की और तालियां बजाकर विरोध जताया।
गेट मीटिंग दोपहर डेढ़ से ढाई बजे तक चली। एचपीयू के करीब डेढ़ सौ कर्मचारियों ने वर्क टू रूल को भी जारी रखा। इनमें परीक्षा शाखा और लाइब्रेरी के कर्मचारी भी शामिल हैं। पांच बजे के बाद परीक्षा शाखा में कोई काम नहीं हो पा रहा।
लिहाजा, नतीजे घोषित करने में देरी होना तय है। लाइब्रेरी में जाने वाले विद्यार्थियों को भी खासी दिक्कत हो रही है। कर्मचारियों को जेसीसी अध्यक्ष डॉ. हितेश्वर सिंह ठाकुर, महा सचिव गीता राम ठाकुर, समन्वयक नरेश कुमार, मीडिया प्रभारी एवं मुख्य समन्वयक चौधरी वरयाम सिंह बैंस ने संबोधित किया।
जेसीसी के पदाधिकारियों ने सेवादार, पुस्तकालय में रिक्त पदों और कर्मचारियों पर काम के बोझ से राहत दिलाने के लिए नई भर्ती की मांग की। कुल सचिव के पद पर वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी को तैनात करने, कारपेंटर, इलेक्ट्रिशियन और अन्य चतुर्थ श्रेणी कर्मियों के पदों को जल्द भरे जाने की मांग भी की।
विश्वविद्यालय प्रशासन पर गैर जिम्मेदाराना रवैया अपनाने का आरोप भी लगाया गया। चेताया गया कि कर्मचारियों की मांगों को पूरा नहीं किया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। कर्मचारी काले बिल्ले लगाकर सामूहिक अवकाश पर जाएंगे और कुल सचिव दफ्तर के सामने धरना करेंगे।
प्रति कुलपति ने सुनीं कर्मचारियों की बात
कर्मचारियों के आंदोलन के बाद प्रति कुलपति प्रो. राजेंद्र सिंह चौहान ने जेसीसी पदाधिकारियों के साथ बैठक की। इस दौरान जेसीसी अध्यक्ष डा. हितेश्वर ठाकुर और तेज राम शर्मा, चौधरी वरयाम सिंह बैंस ने मांगों को प्रति कुलपति के समक्ष रखा।
कहा कि नौ जुलाई को कुलपति के समक्ष मांगें उठाए जाने के दौरान आश्वासन मिला पर एक भी मांग को पूरा नहीं किया गया। जब तक कर्मचारियों की मांगें पूरी नहीं की जाएंगी, आंदोलन जारी रहेगा।