राज्य सरकार द्वारा बनाए जा रहे मेरिटोरियस स्कूलों में जुलाई से पढ़ाई शुरू हो जाएगी। स्कूलों में दाखिले की प्रक्रिया लगभग आखिरी चरण में है। यह जानकारी सोमवार को शिक्षामंत्री डॉ. दलजीत सिंह चीमा ने सेक्टर-70 में बनाए जा रहे सीनियर सेकेंडरी स्कूल फॉर मेरिटोरियस स्टूडेंटस का निरीक्षण करने के बाद दी।
पत्रकारों से बातचीत में डा. चीमा ने कहा कि राज्य में छह मेरिटोरियस स्कूल बनाए जा रहे हैं। जहां सरकारी स्कूलों में दसवीं कक्षा में 80 प्रतिशत से अधिक अंक लेने वालों को दाखिला दिया जाएगा।
इन स्कूलों निर्माण पर 150 करोड़ की लागत आएगी। स्कूल मोहाली, पटियाला, बठिंडा, लुधियाना, जालंधर एवं अमृतसर में बनाए जा रहे हैं। डॉ. चीमा ने बताया कि मौजूदा समय स्कूलों के लिए फैकल्टी का चयन का कार्य अंतिम चरण में चल रहा है। स्कूलों में दाखिले के लिए आवेदन देने की अंतिम तिथि तीस जून रखी गई है।
मोहाली के लिए 240 आवेदन आए
डॉ. चीमा ने बताया कि अब तक हासिल हुए आवेदनों में से 240 विद्यार्थियों ने मोहाली के रिहायशी स्कूल को पहली पसंद के तौर पर चुना है। उन्होंने कहा कि यहां दाखिला लेने वाले विद्यार्थियों को नि:शुल्क शिक्षा हॉस्टल और खाने की सुविधा दी जाएगी। उन्होंने स्कूल के एक-एक कमरे में जाकर निरीक्षण किया। उनके साथ जिला शिक्षा अधिकारी मेवा सिंह भी थे।
नि:शक्त विद्यार्थियों के लिए विशेष इंतजाम
डीईओ ने शिक्षामंत्री को बताया कि 7.20 एकड़ रकबे में बनाए स्कूल कांप्लैक्स में चार बिल्डिंग हैं। जिनमें से स्कूल के अतिरिक्त स्टाफ के लिए रिहायश एवं लड़कों और लड़कियों के हॉस्टल हैं। लड़कों के हॉस्टल की क्षमता 400 की है।
लड़कियों के हॉस्टल की क्षमता 600 हैं। गमाडा के चीफ इंजीनियर तिरलोचन ने बताया कि नि:शक्त विद्यार्थियों के लिए स्कूल में विशेष कमरे एवं टॉयलेट बनाए गए हैं, दो मंज़िला स्कूल में कुल 27 कमरे हैं। जिनमें से 18 क्लास रूम, 7 विज्ञान प्रयोगशालाएं, 2 कंप्यूटर प्रयोगशालाएं, 1 स्टाफ एवं 1 प्रिंसीपल का कमरा है।