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'मोदी पीएम बने तो भी नहीं बदलेगी अर्थव्यवस्था'

Thu, 01 May 2014 12:10 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
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देश की अर्थव्यवस्था अभी नाजुक दौर में है। चुनावी रिजल्ट के बाद अगर नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री बने तो भी इसमें बड़े स्तर पर सुधार की उम्मीद नहीं की जा सकती। विकसित देशों की श्रेणी में खुद को शामिल करने के लिए कम से कम मौजूदा 4.8 जीडीपी के लक्ष्य को कम से कम 6 रखना होगा।
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कुछ इस तरह के विचार बुधवार को जाने माने अर्थशास्त्री और प्राइम मिनिस्टर इकोनामिक एडवाइजरी काउंसिल के सदस्य प्रो. पुलीन के नायक ने पंजाब यूनिवर्सिटी में रखे। प्रो.नायक पीयू के यूआईसीईटी ऑडिटोरियम में क्लोकियम लेक्चर (महीने का खास लेक्चर) में हिस्सा लेने के लिए आए थे।

उन्होंने ह्यूमिनिस्टिक इकोनामिक्स ए ब्लूप्रिंट... थीम पर लेक्चर दिया। यह लेक्चर पीयू के एल्युमनी और डीआरडीओ के पूर्व डायरेक्टर राजेंद्र एन नाथ की याद में शुरू किया गया है। लेक्चर में प्रो. नायक ने महात्मा गांधी द्वारा इकोनामिक्स पर उनके विचारों को साझा किया।
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उन्होंने बताया कि गांधी ने हमेशा ही लिमिटेशन ऑफ वांट्स... के रूल को फॉलो किया। उन्होंने भारत और अमेरिका की इकोनॉमी पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने अमेरिका जैसी डेवलेप देश में भी आर्थिक तौर पर बड़े स्तर पर भेदभाव को गलत संकेत बताया।

नायक ने बताया कि दुनिया भर में प्रति व्यक्ति आय के मामले में भारत 1700 रुपये प्रति डालर के हिसाब से सबसे निचले पायदान पर है। जबकि यूएसए में प्रति व्यक्ति आय 48,000 और चीन में 5,000 है। ह्यूमन डेवेलपमेंट के मामले में भारत का रैंक दुनिया के 180 देशों में 135वें स्थान पर है।
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