दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) में अब कुलपति के लिए सेकेंड टर्म का प्रावधान हो गया है। अब तक कुलपति का कार्यकाल पांच साल का ही निर्धारित है।
इस तरह से कुलपति की नियुक्ति के लिए होने वाली सर्च कमेटी के सामने मौजूदा वीसी भी दूसरे कार्यकाल के लिए आवेदन कर सकेंगे।
वहीं, डीयू शिक्षकों के लिए भी कोड ऑफ एथिक्स लागू कर दिया गया है। डीयू कार्यकारी परिषद की बृहस्पतिवार को हुई अहम बैठक में इन प्रस्तावों को परिषद सदस्यों के विरोध के बावजूद मंजूरी दे दी गई है।
कार्यकारी परिषद की बैठक में प्राचार्यों का कार्यकाल अब पांच साल निर्धारित कर दिया गया है लेकिन यह बढ़कर दस साल हो सकता है। अब तक कॉलेज के प्रिंसिपल की नियुक्ति को लेकर कोई निर्धारित अवधि तय नहीं थी।
यह भी पढ़ें: नॉर्थ-ईस्ट वालों के लिए बनेगा अलग हॉस्टल
इस बैठक में हुए निर्णय के कारण आने वाले समय में प्रिंसिपल के लिए भी पांच साल के कार्यकाल की बजाय दस साल के कार्यकाल को कुलपति की मंजूरी उसी दिन मिल जाएगी जिस दिन इस बारे में यूजीसी की ओर से जरूरी औपचारिकताएं पूरी कर ली जाएंगी।
शिक्षकों के लिए कोड ऑफ प्रोफेशनल एथिक्स के प्रस्ताव को लेकर कार्यकारी परिषद के सदस्य डॉद़त्य नारायण मिश्रा व आभा देव हबीब व जावेद चौधरी ने कड़ा विरोध दर्ज कराया। परिषद सदस्य डॉ. आदित्य नारायणा मिश्रा ने कहा कि कोड ऑफ एथिक्स लागू करने से शैक्षिक माहौल पर असर पड़ेगा।
वहीं, कुलपति के पांच साल के कार्यकाल को ही सही ठहराया है। डॉभ़ा देव हबीब के मुताबिक नए बदलाव को लागू करना सही नहीं है। इसके कारण कुलपति को शिक्षकों पर सीधे कार्रवाई करने का अधिकार मिल गया है।