दिल्ली विश्वविद्यालय में शिक्षकों को कक्षाओं तक लाने के लिए एक स्टडी हो रही है। इसमें टीचरों को चेक करने की तकनीक को भी रखा गया है। छात्रों का दावा है कि स्टडी से उच्च शिक्षण संस्थानों को इस संबंध में नीतियां बनाने में भी मदद मिल सकती है।
स्टडी के लिए मानव संसाधन विकास मंत्रालय, यूजीसी, विश्वविद्यालय प्रशासन और दिल्ली विश्वविद्यालय शिक्षक संघ से भी सुझाव लिए जाएंगे। डीयू के श्यामा प्रसाद कॉलेज के दस छात्र और तीन टीचर ‘उच्च शिक्षा में शिक्षकों की अनुपस्थिति-बुराइयां और उपचार’ विषय पर स्टडी कर रहे हैं। यह स्टडी डीयू के इनोवेशन प्रोजेक्ट का हिस्सा है।
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इनोवेशन प्रोजेक्ट होने के कारण छात्रों को ग्रेजुएशन स्तर पर ही अनुसंधान करने का मौका मिल रहा है। स्टडी से जुड़ी बीकॉम ऑनर्स (द्वितीय वर्ष) की छात्रा आशिमा गोयल ने बताया कि इसके लिए डीयू के लगभग 20 कॉलेज, नए पुराने कोएड और महिला कॉलेज को शामिल किया है।
कॉलेजों से जुड़े 1000 छात्रों, 200 शिक्षकों, 20 प्रिंसिपल और 100 अभिभावकों के जरिए यह सर्वे होगा। उन्होंने बताया कि इससे प्राप्त होने वाले निष्कर्षों से यह जाना जा सकेगा कि शिक्षकों के न आने से क्या बुराइयां हो सकती हैं और इसको दूर करने के लिए क्या कदम उठाए जा सकते हैं।
डीयू में चल रहे ‘अंतरध्वनि’ फेस्टिवल के अंतर्गत बनाए गए इनोवेशन प्लाजा में शामिल इस प्रोजेक्ट को काफी सराहाना मिल रही है।