दिल्ली विवि में नए सेशन को शुरू करने में देरी का कारण बन रहा कोर्सेज के पुनर्गठन के फॉर्मूले को तैयार कर विवि प्रशासन ने कॉलेजों को भेज दिया है। इस फॉर्मूले में तीसरे व चौथे सेमेस्टर में कॉलेजों को कोर्स वाइज कौन से मुख्य पेपर व कौन से एलॉयड पेपर पढ़ाने हैं, इसकी जानकारी दी गई है।
डीन ऑफ कॉलेज की ओर से कॉलेजों को भेजे गए पत्र में कहा गया है कि अब इस आधार पर वह अपने कॉलेज के वर्कलोड व टाइम टेबल का निर्धारण कर सकते हैं व शिक्षकों की नियुक्ति की प्रक्रिया को अंजाम दे सकते हैं।
हालांकि इसके बावजूद नया सेशन कब से शुरू होगा इसको लेकर स्थिति साफ नहीं हो रही है। कॉलेज फॉर्मूला मिलने के बावजूद वर्कलोड व टाइम टेबल बनाने के लिए समय की कमी बता रहे हैं।
डीन ऑफ कॉलेज प्रो. मालाश्री लाल की ओर से कॉलेजों को भेजे गए पत्र में कहा गया है कि कोर्सेज के पुनर्गठन करने की यूजीसी की सिफारिशों को कुलपति की ओर से गठित प्रिंसिपल कमेटी के पास भेजा गया था।
इस कमेटी की सिफारिशों के आधार पर सभी विभागों की कमेटी ऑफ कोर्सेज को बैठकर तीसरे व चौथे सेमेस्टर के लिए मुख्य व एलॉयड के लिए पेपर निर्धारण करने को कहा था। जिसके बाद कॉलेजों को जानकारी भेजी जा रही है।
साथ ही कहा गया है कि कुछ विभागों ने जानकारी नहीं भेजी है लिहाजा उनके बारे में जल्द ही जानकारी दी जाएगी। के रामलाल आनंद कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. विजय शर्मा ने बताया कि विवि प्रशासन की ओर से कौन से सेमेस्टर में कौन से मुख्य विषयों व एलॉयड कोर्सेज पढ़ाने है इसकी सूची भेज दी है।
उन्होंने कहा कि अब हम वर्कलोड बनाने की परिस्थति में आ गए हैं। लेकिन अब भी समय कम है क्योंकि टाइम टेबल बनाने में एक सप्ताह लगेगा। यह सब संभावित है।
वहीं कुछ कॉलेज प्रिंसिपल दबी जुबान में स्वीकार कर रहे हैं कि फॉर्मूला मिलने केबाद भी 21 जुलाई से सेशन शुरु होने में असमंजस है।
डूटा ने उठाए सवाल, एसी-ईसी में पास नहीं कराने का आरोप
वहीं दिल्ली विवि शिक्षक संघ(डूटा) ने इस पूरी प्रक्रिया को सवालों केघेरे में खड़ा कर दिया है। डूटा अध्यक्ष डॉ नंदिता नारायण ने आरोप लगाया कि इसे एकेडमिक व एग्जिकयूटिव काउंसिल में पास कराया जाना जरुरी था इस फॉर्मूले को बिना पाए कराए ही कॉलेजों को भेज दिया गया है। वहीं अभी तक सभी विषयों केसंबंध में जानकारी नहीं दी गई है। उन्होंने कहा कि जल्दबाजी में ऐसा करकेप्रशासन ने जानबूझ कर संकट की स्थिति पैदा कर दी है। अभी काफी कुछ स्थिति स्पष्ट नहीं है। उन्होंने कहा कि प्रशासन को प्रिंसिपल की ओर से वर्कलोड बनाने व टाइम टेबल निर्धारण केलिए कम से कम एक सप्ताह की मांग किए जाने की अपील पर गौर करना चाहिए था। इस मामले में डूटा ने बृहस्पतिवार को एमरजेंसी मीटिंग बुलाई है।