उच्च न्यायालय की सख्ती के बाद उत्तराखंड सरकार उच्च शिक्षा में सुधार के दावे जरूर कर रही है, लेकिन हकीकत इसके बिलकुल उलट है।
दून विवि के कुलपतिविहीन होने के आसार
प्रदेश में पंतनगर और उत्तराखंड तकनीकी विवि जैसे दो बड़े विश्वविद्यालय पहले से बिना कुलपति के चल रहे हैं और अब दून विश्वविद्यालय के भी कुलपतिविहीन होने के आसार बन गए हैं।
विवि के कुलपति का कार्यकाल मार्च में खत्म हो रहा है, लेकिन शासन ने न तो नए कुलपति के लिए खोज शुरू की है, न ही मौजूदा कुलपति का कार्यकाल बढ़ाने की पहल।
पंतनगर विश्वविद्यालय साढ़े तीन साल से बिना कुलपति चल रहा है। कुमाऊं विवि के कुलपति डा. एचएस धामी पर ही अतिरिक्त प्रभार है। इसी तरह डेढ़ साल से उत्तराखंड तकनीकी विवि भी बिना स्थायी कुलपति के चल रहा है। यहां की जिम्मेदारी दून विवि के कुलपति प्रो. वीके जैन के पास है।
लेकिन प्रो. जैन का कार्यकाल चार मार्च को समाप्त होने वाला है। इसके बाद तकनीकी विवि और दून विवि दोनों खाली हो जाएंगे। हालांकि, सरकार पंतनगर और तकनीकी विवि के लिए कुलपति की खोज को समिति बना चुकी है, लेकिन अब तक कोई ठोस नतीजा नहीं निकला है।
न नया कोर्स, न विकास
स्थायी कुलपति न होने का असर तकनीकी विवि और पंतनगर की शिक्षा व्यवस्था पर साफ नजर आता है। पंतनगर में कई विकास कार्य अटके हुए हैं, नए पाठ्यक्रम भी शुरू नहीं हो पा रहे।
इसी तरह तकनीकी विवि में भी डेढ़ साल से अकादमिक परिषद और ढाई साल से कार्यकारी परिषद की बैठक न होने से कोई नया पाठ्यक्रम या परीक्षा संबंधी निर्णय नहीं हो सका है।
अब दून विवि भी इसी राह पर बढ़ने वाला है। खास बात यह है कि दून विवि में इस बार अब तक अकादमिक परिषद की बैठक नहीं हो सकी है। इस बैठक में नए पाठ्यक्रम या पुराने पाठ्यक्रमों में बदलाव संबंधी फैसले हो जाते थे।
हम दून विवि के कुलपति की नियुक्ति के लिए प्रक्रिया शुरू करने जा रहे हैं। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के सचिव को विशेषज्ञ का नाम सुझाने के लिए पत्र भेजा है। उम्मीद है एक दो दिन में सर्च कमेटी बन जाएगी। अन्य विश्वविद्यालयों के लिए पहले ही सर्च कमेटियां काम कर रही हैं।
- राधिका झा, सचिव, उच्च शिक्षा