अपनी पार्टी में ही बगावत से जूझ रहे मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल दिल्ली पुलिस के साथ भी भिड़ गए हैं। उनका गुस्सा चरम पर है। अपने दो मंत्रियों के साथ उलझने वाले पुलिस अधिकारियों को निलंबित कराने के लिए वह गृहमंत्रालय के बाहर धरने पर भी बैठने को तैयार हैं।
इसके लिए उन्होंने केंद्र सरकार को सोमवार सुबह 10 बजे तक का अल्टीमेटम दिया है। साथ ही दिल्ली पुलिस को प्रदेश सरकार के आधीन करने की भी मांग की है। मुख्यमंत्री का कहना है कि पुलिस अधिकारियों के निलंबन से दिल्ली पुलिस के भीतर डर बैठेगा और वह अपना काम पूरी जिम्मेदारी के साथ करेगी।
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केजरीवाल ने शुक्रवार शाम को गृहमंत्री सुशील कुमार शिंदे से मुलाकात की और पुलिस अधिकारियों को निलंबित करने के लिए सोमवार सुबह 10 बजे तक का अल्टीमेटम दिया। ऐसा नहीं होने केजरीवाल ने अपने मंत्रिमंडल के सदस्यों के साथ नार्थ ब्लाक स्थित गृहमंत्रालय के बाहर धरने पर बैठकर आंदोलन करने की धमकी दी है।
मुख्यमंत्री का कहना है कि अपराध होने पर लोग दिल्ली सरकार से जवाब मांगते हैं न कि गृहमंत्रालय से। ऐसे में पुलिस को दिल्ली सरकार के हवाले कर देना चाहिए। केजरीवाल और शिंदे की मुलाकात के बाद दिल्ली पुलिस कमिश्नर बीएस बस्सी ने गृहसचिव अनिल गोस्वामी से मुलाकात कर अपना पक्ष रखा।
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बस्सी के मुताबिक शुरुआती जांच में उनके पुलिस अधिकारियों का कोई दोष सामने नहीं आया है। शिंदे से मुलाकात के बाद केजरीवाल ने मीडिया से कोई बात नहीं की और सीधे अपनी गाड़ी में बैठकर चले गए। उनके साथ आए आप के मंत्री मनीष सिसोदिया ने कहा कि विदेशी महिला के साथ हुए बलात्कार, महिला को जलाने के मामले और दक्षिणी दिल्ली में ड्रग और सेक्स रैकेट मामलों में ढिलाई बरतने वाले अधिकारियों को तुरंत बर्खास्त करने की मांग की गई है।
साथ ही गृहमंत्री से कहा गया है कि केंद्र सरकार दिल्ली पुलिस को प्रदेश सरकार के आधीन करे। उनके मुताबिक अगर केंद्र चाहे तो नई दिल्ली म्यूनिसिपल कारपोरेशन (एनडीएमसी) के इलाके की पुलिस पर सीधे नियंत्रण रख सकती है। गौरतलब है कि दिल्ली पुलिस भले दिल्ली में काम करती हो लेकिन उसका संचालन बाकी राज्यों की तरह दिल्ली सरकार के आधीन नहीं बल्कि केंद्र सरकार के आधीन है।