राजधानी दून के डीएवी पीजी कॉलेज में छात्रसंघ अध्यक्ष पारस गोयल की गुंडई ने सैकड़ों युवाओं से आईबीएम जैसी कंपनी में नौकरी का मौका छीन लिया।
विज्ञापन
अध्यक्ष ने कंपनी के प्रतिनिधियों और छात्रों को बाहर का रास्ता दिखा दिया। मामले में कॉलेज प्रशासन अध्यक्ष के खिलाफ कार्रवाई से बच रहा है। छात्रसंघ अध्यक्ष ने खुलेआम गुंडागर्दी की, लेकिन प्राचार्य का कहना है कि लिखित शिकायत मिलने पर कार्रवाई होगी। इससे छात्रों में नाराजगी है।
डीएवी कॉलेज में दो साल बाद कोई कंपनी प्लेसमेंट के लिए आई थी। आईबीएम इंडिया कंपनी के अधिकारियों का कहना था कि चयनित छात्रों को 2.60 लाख रुपये का सालाना पैकेज मिलेगा। कैंपस प्लेसमेंट के लिए कॉलेज प्रशासन ने एमए, एमएससी और एमकॉम के छात्रों को एसएमएस से सूचित किया था।
विज्ञापन
मंगलवार को जैसे ही दीनदयाल उपाध्याय सभागार में प्लेसमेंट की प्रक्रिया शुरू हुई छात्रसंघ अध्यक्ष ने हंगामा कर दिया। उनका आरोप था कि प्रक्रिया में बाहरी छात्र शामिल हो रहे हैं।
उन्होंने कंपनी के अधिकारियों के अलावा शिक्षकों और छात्रों को बाहर का रास्ता दिखा दिया। मल्टीनेशनल कंपनी में नौकरी की आस में दूर दराज से छात्र आए थे। कंपनी एक सूची तैयार कर चयनित छात्रों का फोन इंटरव्यू करवाकर चयन करने वाली थी।
तीन साल पहले 44 को दी थी नौकरी
आईबीएम कंपनी ने तीन साल पहले कैंपस प्लेसमेंट से डीएवी कॉलेज के 44 छात्रों को नौकरी दी थी। प्लेसमेंट अधिकारी डा. अजय सक्सेना ने बताया कि कॉलेज प्रशासन से सुरक्षा की गारंटी मिले तो कंपनी को दोबारा बुलाने का प्रयास किया जाएगा।
मामले की मौखिक शिकायतें आई हैं, जिस पर छात्रसंघ अध्यक्ष को चेतावनी दी गई है। लिखित शिकायत मिलने पर जांच करने के बाद कार्रवाई की जाएगी। -डा. देवेंद्र भसीन, प्राचार्य, डीएवी कॉलेज
छात्रसंघ अध्यक्ष ने छात्रों से आईबीएम जैसी कंपनी में नौकरी का सुनहरा अवसर छीन लिया है। यह कॉलेज की प्रतिष्ठा का भी सवाल है। -डा. अजय सक्सेना, प्लेसमेंट अधिकारी, डीएवी कॉलेज
मुझे जानकारी मिली थी कि बाहरी छात्र भी प्लेसमेंट में शामिल हो गए हैं। इसलिए मैंने इंटरव्यू प्रक्रिया रुकवाई है। -पारस गोयल, छात्रसंघ अध्यक्ष, डीएवी कॉलेज
निर्माण कार्य भी रुकवाया! डीएवी कॉलेज में 18 कमरों का निर्माण कार्य चल रहा है। सूत्रों के मुताबिक छात्रसंघ अध्यक्ष ने बुधवार को दिन में दो बार निर्माण कार्य रुकवा दिया। इसके पीछे कई वजहें बताई जा रही हैं, जिसमें वसूली के लिए ठेकेदार को धमकाने का आरोप भी शामिल है।
छात्रसंघ अध्यक्ष पारस की हरकत पर नौकरी से वंचित रह गए छात्र नाराज हैं। दूसरे छात्र संगठनों ने भी निंदा की है। सभी का मानना है कि कोई कंपनी रोजगार देने आ रही है तो उसका स्वागत किया जाना चाहिए।
छात्र-छात्राओं का कहना था कि हमने लीडर चुना था, रूलर (शासक) नहीं। ऐसे छात्रनेता की जरूरत नहीं है, जो छात्र हितों से खिलवाड़ करे। दिनभर कॉलेज में अध्यक्ष की गुंडागर्दी चर्चा का विषय बनी रही। एबीवीपी के कई सदस्य भी छात्रसंघ अध्यक्ष के इस कदम से सहमत नहीं हैं।
हम छात्र हित के लिए लड़ते हैं। कंपनी हमारे साथियों को रोजगार देती। इस तरह विरोध करने से न केवल छात्रों के हाथ से मौका निकल गया, बल्कि कॉलेज की प्रतिष्ठा पर भी दाग लगा है। हम इसका विरोध करते हैं। -श्याम सिंह चौहान, प्रदेश महासचिव, एनएसयूआई
प्लेसमेंट प्रक्रिया में इस तरह का व्यवधान कॉलेज के लिए बदनामी है। सैकड़ों छात्रों के हाथ से नौकरी का मौका जाना चिंता की बात है। हम इसका विरोध करते हैं और कॉलेज प्रशासन से छात्रसंघ अध्यक्ष के खिलाफ कार्रवाई की मांग करते हैं। -भगवती प्रसाद, पूर्व महासचिव, डीएवी कॉलेज
छात्र राजनीति के मूल्यों, सरोकारों, सिद्धांतों में गिरावट आई है। गलती छात्रों का नहीं, बल्कि मार्गदर्शकों की है। छात्र अब अंधकार में भटक रहा है। व्यक्तिवादी सोच भी बड़ी वजह है। मेरे कार्यकाल में ऐसी घटना कभी नहीं हुई, जिससे कॉलेज और छात्र राजनीति की बदनामी हो। -रविंद्र जुगरान, भाजपा नेता और पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष