सियासी दखल और छात्रनेताओं में भी पढ़ाई के बजाय राजनीति के चस्के के चलते कभी देश-दुनिया में खास पहचान रखने वाले डीएवी कालेज की गिरती साख पर कालेज के छात्र, पूर्व छात्र, अभिभावक और समाज के विभिन्न वर्गों के लोग भी चिंतित हैं।
हर कोई चाहता है कि डीएवी कालेज एक बार फिर उस पायदान पर पहुंचे, जहां उसकी पहचान प्रदेश के सबसे बेहतरीन कालेज के तौर पर हो। ज्यादातर राजनीति को ही कालेज के गर्त में जाने की वजह मानते हैं। कुछ कहते हैं कि कालेज में छात्रसंघ चुनाव बंद हो जाने चाहिए, वहीं कई छात्र राजनीति का पैमाना तय करने की वकालत करते हैं।
कालेज प्रशासन को पढ़ाई के लिए नियमावली बनानी चाहिए। हर छात्र को कक्षा में आना जरूरी हो। दाखिला साल में एक बार हो। अभी तो कालेज में चुनाव से पहले कक्षा तो दूर समय सारिणी तक नहीं बन पाती। कक्षाओं के नियमित संचालन की निगरानी के लिए अलग से विभाग होना चाहिए।
- प्रकाश सिंह गुसाईं, छात्र
डीएवी में अधिक छात्रसंख्या हमारे लिए गर्व की बात कही जा सकती है, लेकिन इसके साथ गुणवत्ता बढ़ाने के लिए भी जरूरी कदम उठाए जाने चाहिए। कालेज प्रशासन ऐसी व्यवस्था करे कि कोई भी छात्र क्लास बंक न करे, इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलप हो, स्टाफ बढ़ाया जाए।
- एक पाठक, वाया एसएमएस
हम मानते हैं कि कालेज को सबसे ज्यादा नुकसान छात्रसंघ चुनाव और परिसर में बाहरी राजनीति के हावी होने से हुआ है। कालेज का माहौल बेहतर करना है और वहां पढ़ने वाले छात्रों को तवज्जो देनी है तो डीएवी में छात्रसंघ चुनाव हमेशा के लिए पूरी तरह बंद कर देना चाहिए।
-अरविंद राणा और राजेश पंवार (दोनों उत्तरकाशी), मनीष, एससी सिंघल और नारायण जोशी (तीनों देहरादून)
कालेज में छात्रसंघ चुनाव हों, लेकिन इसमें उन्हीं छात्राें को जगह मिलने की व्यवस्था होनी चाहिए जो शैक्षिक, व्यावहारिक मानदंडों पर होनहार हों। कालेज पढ़ाई के लिए होते हैं। ऐसा छात्रसंघ पढ़ने वालों की दिक्कतें बेहतर तरीके से सुधार सकेगा। कालेज की क्वालिटी भी बढ़ेगी।
-एक पूर्व अधिकारी
कालेज में छात्रसंघ चुनाव के लिए विभिन्न संगठन राजनीति करते हैं। इससे कई बार टकराव भी होता है। ऐसी स्थिति से बचने के लिए कालेज प्रशासन को छात्रों के राजनीति करने के लिए नियमावली तैयार करनी चाहिए। इससे छात्रनेता भी नियंत्रण में रहेंगे।
-विक्रांत रावत, छात्र
कालेज की शैक्षिक गुणवत्ता में तभी सुधार हो सकेगा, जबकि दाखिलों पर कालेज प्रशासन नियंत्रण लगा सके। होना यह चाहिए कि कालेज प्रशासन दाखिले के लिए सख्त नियम लागू करे। इससे पढ़ने वाले छात्र ही आएंगे। बुनियादी संसाधनों में भी सुधार होना चाहिए।
-समीर, छात्र
डीएवी के हालात में सुधार के लिए जरूरी है कि यहां विश्वविद्यालय के नियमों का सख्ती से पालन कराया जाए। राजनीतिक दबाव में नियमों में कोई ढील न दी जाए। परीक्षा में बैठने के लिए अगर 75 प्रतिशत उपस्थिति अनिवार्य है तो हर हाल में इसका पालन होना चाहिए।
-सूर्या त्यागी, पूर्व प्राचार्य
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