देहरादून के डीएवी पीजी कॉलेज में दाखिले के लिए एक छात्र सात महीने से घर से दूर है। लखीमपुर खीरी (यूपी) से आकर दून में किराये पर रहते हुए न्याय मांग रहे छात्र ने अब जांच समिति की शरण ली है।
छात्र का कहना है कि मेरिट में आने के बावजूद उसे दाखिला नहीं मिला है। घरवालों ने इतना पैसा खर्च किया है कि अब उन्हें बता भी नहीं सकता कि मेरिट से चयनित होने के बावजूद दाखिला क्यों नहीं हो सका है।
ऐसे ही तमाम मामले जांच समिति के पास आने लगे हैं, जिनमें छात्र का नाम मेरिट में था, लेकिन उन्हें सीट न होने की बात कहकर लौटा दिया गया था। महाविद्यालय में इस बार प्रथम वर्ष में दाखिले मेरिट से हुए थे। तमाम होनहार ऐसे थे, जो ओएमआर शीट में मामूली गलती या कर्मचारियों की लापरवाही से मेरिट की दौड़ से बाहर हो गए थे।
ऐसे कई छात्र सामने आए
तमाम ऐसे भी हैं, जो मेरिट में होने के बावजूद सीट खाली न होने से लौटाए गए। एक छात्रा की शिकायत पर जांच समिति अध्यक्ष इंद्रजीत मल्होत्रा ने डीएवी प्राचार्य को दाखिला देने के निर्देश दिए तो ऐसे कई छात्र सामने आने लगे।
लखीमपुर खीरी (यूपी) निवासी इस छात्र ने जांच समिति से शिकायत की है कि वह सात माह से दून में किराये पर रहकर दाखिले का इंतजार कर रहा है। छात्र को लिखित प्रमाण के साथ शिकायत करने की सलाह दी गई है।
गुरुवार को कई ऐसे पीड़ित छात्रों ने जांच समिति अध्यक्ष पूर्व न्यायाधीश इंद्रजीत मल्होत्रा को अपनी शिकायत सुनाई। उन्होंने ऐसे छात्रों को आश्वासन दिया है कि उन्हें दाखिला दिलवाया जाएगा।