डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम प्राविधिक विश्वविद्यालय (एकेटीयू) से संबद्ध निजी इंजीनियरिंग व मैनेजमेंट कॉलेजों में स्टूडेंट्स से हर कदम पर वसूली हो रही है। कभी उपस्थिति के नाम पर तो कभी सेशनल एग्जाम में अंक देने के नाम पर।
यही नहीं, परीक्षा पूर्व प्रवेश पत्र देने के नाम पर भी पैसे लिए जा रहे हैं। बता दें कि उपस्थिति के नाम पर पैसे मांगे जाने पर बीएनसीईटी के छात्र लवकेश मिश्रा ने बृहस्पतिवार को खुदकुशी कर ली थी।
चालू शैक्षिक सत्र की विषम सेमेस्टर के विभिन्न पाठ्यक्रमों के सेशनल व प्रैक्टिकल एग्जाम के अंक विश्वविद्यालय को 15 जनवरी 2016 को उपलब्ध कराना था। इस बाबत एकेटीयू ने सभी कॉलेजों को 29 दिसंबर 2015 को ही पत्र भेज दिया था।
इसके बावजूद 40 कॉलेजों ने 300 से अधिक स्टूडेंट्स के अंक विवि को उपलब्ध नहीं कराए हैं। जबकि इस समय विवि में विषम सेमेस्टर की परीक्षाओं के परिणाम घोषित करने की तैयारी चल रही है। मार्च के प्रथम सप्ताह से परीक्षा परिणाम आने भी शुरू हो जाएंगे।
ऐसे में इन 300 से अधिक स्टूडेंट्स के परीक्षाफल अधूरे रह जाएंगे। जिसे पूरा कराने के लिए इन्हें कॉलेज व विवि के चक्कर काटने होंगे। निजी कॉलेजों की इसी मनमानी के चलते स्टूडेंट्स का भविष्य दांव पर लग जाता है।
सूबे के जिन 40 कॉलेजों ने अब तक अंक उपलब्ध नहीं कराए, उनमें राजधानी लखनऊ के पांच कॉलेज शामिल हैं। इनमें से तीन की गिनती राजधानी के प्रतिष्ठित निजी संस्थानों में होती है।
जिन 300 छात्र-छात्राओं के अंक रोके गए उनमें 50 फीसदी के करीब तो सिर्फ लखनऊ के ही हैं। इसमें एक प्रतिष्ठित कॉलेज ने 37 छात्रों के अंक नहीं भेजे। वहीं एक कॉलेज ऐसा है, जिसने 96 स्टूडेंट्स के अंक रोके हुए हैं।
सुल्तानपुर रोड पर स्थित जिस कॉलेज ने 96 स्टूडेंट्स के अंक रोके हैं, उस पर पहले भी कई बार स्टूडेंट्स वसूली के आरोप लगा चुके हैं। इसकी शिकायतें भी एकेटीयू के पास पहुंची। मगर, इन संस्थानों को एकेटीयू का डर नहीं है।