पंजाब शिक्षा विभाग ने दसवीं कक्षा के कमजोर विद्यार्थियों को मुफ्त कोचिंग देने का फैसला किया है। लेकिन कमजोर विद्यार्थियों में आरक्षण की शर्त रख दी गई है, जिससे यह फैसला विवादों में घिर गया है।
शिक्षा विभाग ने दसवीं कक्षा के पढ़ाई में कमजोर विद्यार्थियों (स्लो लर्नर्स) के लिए रेमिडियल टीचिंग का फैसला किया है। इसके तहत कमजोर बच्चों को मैथ और साइंस की एक्स्ट्रा क्लासेज करवाई जाएंगी।
डायरेक्टर जनरल स्कूल एजुकेशन ने सभी जिला शिक्षा अधिकारियों, जिला साइंस सुपरवाइजर और स्कूल प्रिंसिपल को इस संबंध में हिदायत जारी की है। इसमें कहा गया है कि हर जिले में कुल बच्चों में से दस प्रतिशत कमजोर बच्चों की पहचान की जाए।
इसमें शर्त लगाई गई है कि चुने गए कमजोर बच्चों में से साठ प्रतिशत अनुसूचित जाति वर्ग से होने चाहिए। बीस फीसदी अल्पसंख्यक वर्ग से होने चाहिए और बीस प्रतिशत अन्य बच्चे होने चाहिए।
टीचरों को अतिरिक्त समय देने पर ऐतराज
रेमेडियल टीचिंग के लिए जिन बच्चों को चुना जाना है, उनके माता-पिता से लिखित सहमति लेनी जरूरी है। इसके साथ ही अभियान में स्कूल मैनेजमेंट कमेटियों को भी शामिल किया जाना है।
सभी स्कूल अपने जिले के साइंस सुपरवाइजर को विषय-वार रेमेडियल टीचिंग लेने वाले विद्यार्थियों का ब्योरा भेजेंगे। साइंस सुपरवाइजर बीस जनवरी तक सारा ब्यौरा मुख्यालय को भेजेंगे, जिसमें विद्यार्थियों के साथ उन टीचरों का ब्योरा भी होगा, जो एक्स्ट्रा क्लास लेंगे।
विभाग के इस फरमान से दो विवाद खड़े हो गए हैं। एक तो आरक्षण पर बहुत से लोग आपत्ति जता रहे हैं। वहीं, टीचरों को अतिरिक्त समय देने पर एतराज है।
जीटीयू ने जताई नाराजगी
गवर्नमेंट टीचर्स यूनियन ने कमजोर बच्चों को कोचिंग में आरक्षण पर नाराजगी जताई है। जीटीयू के प्रेस सचिव हरनेक सिंह मावी ने कहा कि इससे बच्चों में हीन भावना पैदा होगी।
उन्होंने कहा कि कोचिंग का एक मात्र पैमाना यह होना चाहिए था कि जो भी बच्चे पढ़ाई में कमजोर हैं, उनके लिए एक्स्ट्रा क्लास हो। इसमें आरक्षण की शर्त गलत है।
रेमिडियल टीचिंग में आरक्षण की शर्त राज्य सरकार ने नहीं लगाई है। यह केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय का फैसला है। केंद्रीय मंत्रालय के निर्देश पर ही इसे पंजाब में लागू किया गया है।
-वीनू दुग्गल, डिप्टी प्रोजेक्ट डायरेक्टर, रमसा