राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान (रमसा) के तहत उत्तराखंड में स्कूलों और छात्रावासों के निर्माण में घटिया ईंटों के इस्तेमाल और निर्माण मानकों की अनदेखी का खुलासा हुआ है।
45 लाख की पेनल्टी
विभागीय अधिकारियों और रिटायर्ड अभियंताओं की जांच में यह तथ्य सामने आने के बाद शिक्षा महानिदेशालय ने कार्यदायी संस्थाओं का भुगतान रोक दिया है। 45 लाख की पेनल्टी भी लगाई गई है।
अब लोनिवि और अभियोजन विभाग को सभी निर्माणों की जांच के लिए कहा गया है। रमसा के तहत 166 करोड़ की लागत से प्रदेश में कई स्कूल और बालिका छात्रावास बन रहे हैं।
इनके लिए सिंचाई विभाग और ग्रामीण अभियंत्रण सेवा (आरईएस) को कार्यदायी संस्था बनाया गया है। लेकिन दोनों विभागों ने निर्माण में गुणवत्ता नियमों की जमकर धज्जियां उड़ाई हैं। कुछ भवनों में निर्माण पूरा होते ही दरारें पड़ गई हैं।
इसके बाद लोनिवि सचिव अमित सिंह नेगी की ओर से बृहस्पतिवार को विभाग के मुख्य अभियंता सतेंद्र शर्मा को नोडल अधिकारी नामित करते हुए व्यापक जांच का निर्देश दिया गया है।
बताया जा रहा है कि एक करोड़ से अधिक लागत वाले निर्माण कार्यों की जांच नियोजन विभाग, जबकि इससे कम लागत वाले निर्माणों की जांच लोक निर्माण विभाग करेगा।
विभागीय अधिकारियों और अभियंताओं से निर्माण कार्यों की जांच कराई गई थी। जांच में कुछ कमियां सामने आने के बाद कार्यदायी संस्थाओं का आगे का भुगतान रोक दिया है। आज ही लोक निर्माण विभाग से गुणवत्ता जांच कराने का आदेश मिला है। जांच पूरी होने के बाद ही बचा भुगतान किया जाएगा।
- राधिका झा, शिक्षा महानिदेशक