पंजाब यूनिवर्सिटी (पीयू) के साइंस विभाग में बीएससी और बीफार्मा कोर्सों में दाखिले के लिए ली गई संयुक्त प्रवेश परीक्षा (सीईटी) में 12 हजार के अधिक विद्यार्थी बैठे। आवेदन करने वाले 15 फीसदी विद्यार्थी परीक्षा में नहीं बैठ सके।
ऑनलाइन आवेदन फार्म भरने के दौरान हुए भ्रम के कारण कुछ विद्यार्थियों को परीक्षा के दौरान दिक्कत का सामना करना पड़ा और वह परीक्षा में बैठने से वंचित रह गए।
सेक्टर-10 स्थित डीएवी कालेज में दोपहर में जब विद्यार्थी गणित का पेपर देने पहुंचे तो उन्हें परीक्षा में यह कह कर बैठने नहीं दिया गया कि उन्होंने सुबह फिजिक्स और केमिस्ट्री का पेपर नहीं दिया।
बाद में जब विद्यार्थियों और उनके परिजनों ने हंगामा मचाया तो परीक्षा नियंत्रक डॉ. परविंदर सिंह से संपर्क किया गया और उन्होंने उन विद्यार्थियों को परीक्षा में बैठने की इजाजत दे दी, जिन्होंने सुबह फिजिक्स या केमिस्ट्री का पेपर नहीं दिया था। लेकिन, जब तक पीयू ने यह फैसला लिया तब तक कुछ विद्यार्थी वापस जा चुके थे।
ऐसे में वे परीक्षा देने से वंचित रह गए। उधर, विद्यार्थियों का यह भी कहना था कि एक ही दिन में दो परीक्षाएं होने से भी उन्हें नुकसान हुआ। शनिवार को सुबह देहरादून स्थित यूनिवर्सिटी ऑफ पेट्रोलियम एंड एनर्जी स्टडीज का पेपर था, जिसका सेंटर भी पीयू में ही था। ऐसे में सीईटी के लिए आवेदन करने वाले कुछ छात्र परीक्षा नहीं दे पाए।
ऐसे हुए भ्रम
पीयू के नियमों के अनुसार जिन विद्यार्थियों ने बीएससी (गणित) में दाखिला लेना है उन्हें सिर्फ गणित के पेपर के लिए ही आवेदन करना था। लेकिन, प्रास्पेक्टस में यह बात स्पष्ट न होने के कारण गणित विभाग में दाखिला लेने वाले कई विद्यार्थियों ने सिर्फ गणित का विकल्प न भर फिजिक्स, कैमिस्ट्री और मैथैटैक्सि (पीसीएम) का विकल्प भर दिया।
ऐसे में इन विद्यार्थियों ने सुबह फिजिक्स और कैमिस्ट्री की परीक्षा नहीं दी और दोपहर में जब वह गणित की परीक्षा देने आए तो उन्हें परीक्षा में बैठने से पहले रोक दिया गया।
पीयू के अधिकारियों का कहना था कि गणित के पेपर में सिर्फ उन्हीं विद्यार्थियों को बैठने का अधिकार था जिन्होंने या तो पीसीएम का विकल्प भरा है और सुबह फिजिक्स और कैमिस्ट्री के पेपर भी दिए हैं या जिन्होंने सिर्फ गणित का विकल्प भरा था।