सरकारी सहायता प्राप्त डिग्री कॉलेजों के पास सेमिनार व सिम्पोजियम करवाने की फुर्सत नहीं है। उच्च शिक्षा विभाग इसके लिए बजट देने को तैयार है, मगर कॉलेज प्रशासन उन्हें प्रस्ताव ही नहीं भेज रहे।
राजधानी सहित आसपास के सात जिलों में महज पांच कॉलेजों ने ही अभी तक प्रस्ताव भेजा है। यह स्थिति सिर्फ लखनऊ नहीं पूरे प्रदेश के हैं।
कॉलेजों में ये हालत तब है जबकि शिक्षकों की प्रोन्नति में सेमिनार व सिम्पोजियम के प्वाइंट जोड़े जाते हैं। उच्च शिक्षा विभाग ने मई, जून व सितंबर में तीन बार पत्र लिखकर कॉलेजों से प्रस्ताव मांगा।
मगर कॉलेजों की ओर से कोई रिस्पांस न मिलने पर अक्तूबर में क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारी ने पत्र लिखकर सभी कॉलेजों से लापरवाही पर कड़ी नाराजगी जताई है।
राजधानी व आसपास के जिले जिसमें फैजाबाद, हरदोई, रायबरेली, सुल्तानपुर, सीतापुर और उन्नाव शामिल हैं। अब तक केवल पांच कॉलेजों ने ही प्रस्ताव भेजा है।
इसमें राजधानी के दो, बाराबंकी के एक व दो अन्य जिलों के कॉलेज शामिल हैं। राजधानी में ही केवल 20 सहायता प्राप्त कॉलेज व चार राजकीय डिग्री कॉलेज हैं।
संयुक्त निदेशक (उच्च शिक्षा) अनिल कुमार गोयल ने पत्र लिखकर इस पर सख्त नाराजगी जताई गई है। उनका कहना है कि बार-बार प्रस्ताव मांगे जाने के बावजूद कॉलेज सिम्पोजियम और सेमिनार करवाने के लिए कॉलेज कोई दिलचस्पी नहीं दिखा रहे हैं।
जबकि कॉलेजों में स्टूडेंट को पढ़ाई के अलावा सेमिनार व सिम्पोजियम से काफी फायदा मिलता। उन्हें एक से बढ़कर एक टॉपिक पर विशेषज्ञों के लेक्चर सुनने को मिलते और विषय से जुड़ी अच्छी जानकारी हासिल होती।
मगर हैरानी की बात है कि कॉलेज इसमें कोई रुचि नहीं दिखा रहे हैं। अब उच्च शिक्षा विभाग की ओर से नाराजगी जताने के बाद क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारी हरकत में आए हैं।
उन्होंने अपने संबंधित क्षेत्रों के डिग्री कॉलेजों को पत्र भेजकर सेमिनार व सिम्पोजियम के लिए रकम मांगने का प्रस्ताव देने को कहा है, ताकि इसे उच्च शिक्षा परिषद को भेजा जाए और कॉलेजों को बजट मिल सके।
गुरुजी को शिष्यों के साथ अपने भविष्य की भी फिक्र नहीं
डिग्री कॉलेजों के प्राचार्य तीन-तीन बार पत्र लिखने के बावजूद अभी तक सेमिनार व सिम्पोजियम के लिए रकम नहीं मांग पाए। अगर कॉलेजों में सेमिनार व सिम्पोजियम होंगे तो इससे स्टूडेंट को तो फायदा होगा ही।
बल्कि शिक्षकों को भी अपना पेपर प्रेजेंट करने का मौका मिलेगा। पेपर पब्लिश होने से शिक्षकों को प्रमोशन में फायदा होगा। अंतरराष्ट्रीय स्तर के सेमिनार में पेपर प्रस्तुत करने पर 10 अंक, राष्ट्रीय स्तर पर 7 अंक, स्टेट लेवल का सेमिनार व सिम्पोजियम आयोजित करने पर 5 अंक और कॉलेज व यूनिवर्सिटी स्तर पर 3 अंक देने का प्रावधान है।
बीते साल नवयुग को मिले थे 90 हजार रुपये
राजधानी में नवयुग कन्या पीजी कॉलेज ने सेमिनार व सिम्पोजियम करवाने के लिए बीते साल बजट मांगा तो उच्च शिक्षा विभाग की ओर से उसे 90 हजार रुपये तक का बजट दिया गया।
इससे उसने अच्छे ढंग से सेमिनार व सिम्पोजियम आयोजित किया। क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारी डॉ. राम सहाय के मुताबिक जो भी कॉलेज इसके लिए धन की मांग करता है उसे विभाग रकम देने में पीछे नहीं हटता।
इसके बावजूद दिलचस्पी न दिखाना हैरान करने वाला है।