डॉ. एमसी सक्सेना ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस में बीफॉर्मा फर्स्ट सेमेस्टर की छात्रा सुंबुल की मौत के मामले में जांच कमेटी की रिपोर्ट से इंस्टीट्यूट की गर्दन फंसती नजर आ रही है।
जिस दिन इंस्टीट्यूट की छत से गिरकर सुंबुल की मौत हुई उससे एक दिन पहले उसने अपनी डायरी में लिखा था कि वह पढ़-लिखकर कुछ बनना चाहती है।
यानी वह अवसाद में नहीं थी, बल्कि सामान्य थी। उसकी डायरी की हैंडराइटिंग की जांच करने वाले विशेषज्ञ इसकी पुष्टि कर रहे हैं।
विशेषज्ञों के मुताबिक अगर वह अंग्रेजी कम जानने के कारण पढ़ाई से परेशान होती तो वह अपनी डायरी पर ऐसा क्यों लिखती।
सुंबुल के परिवार वाले पहले भी कह चुके हैं कि फीस के लिए इंस्टीट्यूट के लोग दबाव बना रहे थे। जबकि उसका दाखिला अल्पसंख्यक कोटे के तहत हुआ था। इसी के चलते वह पांच हजार रुपये लेकर इंस्टीट्यूट गई थी।
सूत्रों के अनुसार जांच कमेटी ने अभी तक जिन-जिन छात्रों के बयान लिए है, उनमें लगभग सभी ने एक जैसी बातें कही हैं। ऐसा लग रहा है कि छात्र कुछ बोलने से बच रहे हैं।
ऐसे में कमेटी को शक है कि कहीं न कहीं छात्रों पर दबाव बनाया जा रहा है या छात्र किसी से प्रेरित होकर बयान दे रहे हैं। सूत्रों के अनुसार अपनी मौत से चार-पांच दिन पहले सुंबुल ने अपनी फेसबुक नहीं खोली थी।
जांच कमेटी इन तथ्यों को भी बड़ी गंभीरता से ले रही है। उनकी सारी जांच इन्हीं बिंदुओं के आसपास घूम रही है। दूसरी ओर गौतम बुद्ध प्राविधिक विश्वविद्यालय (जीबीटीयू) द्वारा गठित जांच कमेटी फिलहाल इस बारे में कुछ भी नहीं बोल रही है।
कमेटी के चेयरमैन प्रो. जगवीर सिंह व अन्य सदस्य भी इस मामले में टिप्पणी से बच रहे हैं। क्योंकि अभी तक जांच कमेटी की रिपोर्ट जीबीटीयू प्रशासन को नहीं सौंपी गई है।
उधर पुलिस की जांच रिपोर्ट भी अब तक नहीं आई है। पुलिस की रिपोर्ट इस मामले में अहम है। क्योंकि उसकी जांच में कोई और मामला खुल सकता है। सूत्रों के अनुसार फिलहाल जो तथ्य सामने आए हैं उनके मुताबिक इस पूरे मामले में इंस्टीट्यूट ही सवालों के घेरे में है। ऐसे में उसकी मुश्किलें बढ़ सकती हैं।