अब देश भर के विश्वविद्यालयों को नए शैक्षणिक सत्र से रूसा में सीबीसीएस (च्वाइस बेस्ड क्रेडिट सिस्टम) लागू होगा। हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय को पीजी में इसे लागू करना पड़ेगा। बीते सत्र में तैयारी पूरी न होने और छात्र संगठनों के विरोध पर इसे टाल दिया था। मानव संसाधन मंत्रालय भारत सरकार की छह जनवरी 2015 को दिल्ली में शिक्षा मंत्रियों, प्रधान सचिवों और कुलपतियों की बैठक में इसके निर्देश दिए गए।
बैठक की अध्यक्षता केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने की। इसमें क्रेडिट प्रणाली (सीबीसीएस) और कौशल विकास का क्रेडिट ढांचा (सीएफएसडी) पर चर्चा हुई। सभी विश्वविद्यालयों को कॉलेज और विवि में सीबीसीएस के क्रियान्वयन और सीएफएसडी को स्वीकार कर लागू करने को कहा गया। 2015-16 तक सभी संस्थानों में इसे लागू करने के आदेश दिए गए।
समय से करनी होगी तैयारी
यूजीसी ने विश्वविद्यालयों, संस्थानों के वरिष्ठ संकाय सदस्यों की कमेटी बनाकर सीबीसीएस और क्रेडिट फ्रेम वर्क फॉर स्किल डेवलपमेंट (सीएफडब्लू एसडी) के सफलतापूर्वक क्रियान्वयन को समयबद्ध कार्य योजना विकसित करने के आदेश दिए गए हैं।
संस्थान प्रमुखों को जल्द पाठ्यक्रमों का सत्रीकरण करने, मापदंडों के रूप में पाठ्य विवरणों का पुनर्गठन करने, परीक्षाओं का मानकीकरण और अंकीय प्रदान करने वाली प्रणाली से ग्रेडिंग प्रणाली में बदलने के निर्देश दिए हैं। इसके लिए यूजीसी ने सीबीसीएस लागू करने को दिशा निर्देशक सामग्री तैयार की है।
लागू करना ही होगा नया सिस्टम : डा. अमरदेव
प्रदेश के रूसा निदेशक डा. अमरदेव ने कहा कि अब पीजी में भी नए सत्र से सीबीसीएस लागू करना जरूरी है। दिल्ली में हुई बैठक में उच्च शिक्षा में मल्टी एंट्री और एग्जिट की व्यवस्था और कोर्स में ग्रेडिंग लागू कर एकरूपता और रोजगार के अधिक से अवसर मुहैया करवाना उद्देश्य था।
तकनीकी कोर्स करने वाले छात्र भी बी वोकेशनल की डिग्री लेकर अन्य स्नातक डिग्री धारकों की श्रेणी में आएंगे। डिप्लोमा कोर्स पूरा करने पर यूजी कोर्स में सीधे प्रवेश पा सकेंगे।