पूरी दुनिया में दून शिक्षा नगरी के नाम से मशहूर है। लेकिन इस सुनहरे सिक्के का दूसरा पहलू बिल्कुल काला है। यह पहलू हैं उन सरकारी स्कूलों का जो बस नाम के लिए चल रहे हैं।
कारगी चौक स्थित राजकीय कन्या पूर्व माध्यमिक विद्यालय (जीजीआईसी) को ही लीजिए, यहां तीन कक्षाओं में कुल 142 छात्राएं हैं, लेकिन शिक्षिका सिर्फ एक।
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सरकारी शिक्षा व्यवस्था को लेकर बड़े-बड़े दावे करने वाले शिक्षामंत्री इस स्कूल में आएं तो उनका भ्रम जरूर टूट जाएगा। इस स्कूल में सत्र की शुरुआत में तीन शिक्षिकाएं थीं। शिक्षिका मालती रावत का एक सप्ताह पूर्व ट्रांसफर कर दिया गया। रतनेश्वरी शाह चाइल्ड केयर लीव (सीसीएल) पर हैं। एकमात्र शिक्षिका शीला नेगी सुबह से शाम तक कक्षा छह, सात और आठ में बारी-बारी से पढ़ाती हैं।
अगले माह अर्द्ध्रवार्षिक परीक्षाएं होनी हैं, लेकिन कोर्स अधूरा है। एक अभिभावक ने बताया कि उनकी बेटी रोज बताती है कि टीचर नहीं होने से स्कूल में पढ़ाई ही नहीं होती। शिक्षा व्यवस्था की यह व्यथा इसी स्कूल में खत्म नहीं होती। ठीक सामने स्थित है प्राथमिक विद्यालय में भी यही हाल है।
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कक्षा एक से पांच तक के 188 बच्चों पर सिर्फ दो शिक्षिकाएं हैं। कुल चार शिक्षिकाओं में से एक दीपा बमराडा का हाल ही में ट्रांसफर हो गया, जबकि शारदा बलोदी सीसीएल पर हैं। अब केवल सीमा कोठियाल व नीशा रतूड़ी ही इन बच्चों को पढ़ाती हैं।
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