राजधानी में एसएससी टीयर 2 (मेन) परीक्षा में पकड़े गए नकलची इस चरण तक ब्लूटूथ की मदद से ही पहुंचे थे।
यह खुलासा पुलिस पूछताछ में उन्होंने खुद किया है। इससे एसएससी की परीक्षा गोपनीयता और बेदाग छवि पर सवाल उठने लगे हैं। एसजीआरआर बिंदाल में पकड़ी गई नकलची स्वाति के पति ने बताया कि टीयर 1 (प्री) परीक्षा में भी उसका केंद्र देहरादून में ही था।
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वहां भी स्वाति ने ब्लूटूथ और मोबाइल की मदद से नकल की थी और बेहतरीन अंक हासिल किए थे। टीयर 2 में वह पास हो जाती तो अगले चरण में उसे दिक्कत नहीं होती। दूसरे नकलची ने बताया कि प्री परीक्षा में ब्लूटूथ लेकर केंद्र में घुसने में डर लगा था, लेकिन काम बन गया तो मेन में वह बेधड़क गया और आराम से जवाब पूछता रहा।
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नकलचियों के खुलासे से साफ हो गया है कि प्री परीक्षा में कहीं न कहीं परीक्षार्थियों की तलाशी में लापरवाही बरती गई। यह भी सवाल उठने लगा है कि ये तो वे छात्र हैं, जो अब पकड़ में आए हैं। इनके अलावा भी कई परीक्षार्थियों ने प्री परीक्षा में नकल की होगी।
पांच साल के लिए लग सकता है प्रतिबंध
कर्मचारी चयन आयोग की ओर से जारी कंबाइंड ग्रेजुएट लेवल परीक्षा की अधिसूचना में नकल के नियम बेहद सख्त हैं। परीक्षा में मोबाइल फोन का इस्तेमाल तो हो ही नहीं सकता, स्विच ऑफ मोड में भी फोन लाना पूर्णत: प्रतिबंधित है। कोई अभ्यर्थी मोबाइल से नकल करते हुए पाया गया तो आयोग तत्काल उसका आवेदन रद्द कर देगा।
आयोग को यह भी अधिकार है कि वह ऐसे अभ्यर्थी पर पांच साल के लिए प्रतिबंध लगा सकता है। यानी पांच वर्षों तक आयोग की किसी भी परीक्षा में ऐसा नकलची प्रतिभाग नहीं कर सकता है।
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