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जानिए, क्या है पंजाब शिक्षा विभाग की नई तबादला नीति

Wed, 21 May 2014 04:45 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
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शिक्षा विभाग ने आगामी सेशन के लिए तबादला नीति का ऐलान कर दिया है। जिसके तहत तीन साल पूरे होने के बाद ही तबादले के लिए आवेदन किया जा सकेगा। तबादले के इच्छुक टीचर 26 मई तक आवेदन कर सकेंगे।
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पंजाब के शिक्षा मंत्री सिकंदर सिंह मलूका ने बताया कि इच्छुक टीचरों को आवेदन में तीन से पांच स्थान विकल्प के रूप में देने होंगे। स्टेशन खाली होने पर ही तबादला संभव होगा। खाली पदों के आधार पर ही बदलियां की जाएंगी, सरप्लस पदों पर बदली नहीं होगी। निर्धारित समय में ज्वाइन न करने वालों की बदली रद्द कर दी जाएगी।

सिर्फ वही लोग आवेदन कर सकेंगे जिनके खिलाफ विभागीय जांच लंबित न हो। मौजूदा स्कूल में तैनाती 31 जुलाई-11 या उससे पहले की होनी चाहिए।

साइंस-कॉमर्स लेक्चरर और वोकेशनल मास्टरों की बदलियां उन स्कूलों में होंगी, जहां इन विषयों के हेल्दी ग्रुप चलते हों, यानी विद्यार्थियों की संख्या पर्याप्त हो।
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डेड ग्रुप में इन टीचरों के पद सरप्लस माने जाएंगे, इन पर बदली नहीं होगी। खाली पदों की जानकारी जिला शिक्षा अधिकारियों की वेबसाइट से से मिलेगी।

मलूका ने स्कूल मुखियों को हिदायत दी कि सिर्फ शर्तें पूरी करने वाले टीचरों की ही सिफारिश करें। रमसा और एसएसए वाले टीचर सिर्फ रमसा-एसएसए स्कूलों में बदली के लिए ही आवेदन कर सकेंगे। कर्मचारी इस सेशन के दौरान एक ही बार प्रार्थना पर बदली करा सकता है। अगर दूसरी बदली हो जाए तो उसे लागू नहीं किया जाएगा।

प्राइमरी स्कूलों में कम से कम दो टीचर होने जरूरी हैं, बदलियां करते समय इसका भी ध्यान रखा जाएगा। मलूका ने कहा कि आम मामलों के अलावा सजा के तहत, कम नतीजे पर, शिकायत, खराब परफॉर्मेंस, विभागीय ड्यूटी में लापरवाही और प्रबंधकीय कारणों व लोकहित में भी बदली की जा सकती है।

गैर सरकारी कामों के लिए लेनी पड़ेगी छुट्टी
पंजाब सरकार ने सरकारी स्कूलों में तैनात टीचरों का गैर सरकारी गतिविधियों में हिस्सा लेने का कड़ा नोटिस लिया है। साथ ही इस संबंध में कड़े आदेश देते हुए अधिकारियों को इस पर नियमित निगरानी रखने को कहा है।

शिक्षा मंत्री मलूका ने हिदायत दी है कि सरकारी टीचर यदि ड्यूटी के दौरान गैर सरकारी व अन्य गतिविधियों में हिस्सा लेते हैं तो उन्हें पहले छुट्टी मंजूर करानी होगी।

सभी जिला शिक्षा अधिकारियों से कहा गया है कि जो टीचर बगैर छुट्टी की मंजूरी के ऐसी गतिविधियों में हिस्सा लेते हैं, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। ताकि स्कूलों का कामकाज प्रभावित न हो।
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