सीबीएसई अपने सभी स्कूलों में नए सेशन से एक बेहद खास नियम लागू करने जा रहा है। यह फिटनेस टेस्ट से जुड़ा है। अब सीबीएसई स्कूलों के खिलाड़ियों को फिटनेस टेस्ट देते समय घर के नियमों यानी स्वदेशी मापदंडों पर खरा उतरना होगा। अब तक सीबीएसई गेम्स में भाग लेने वाले छात्र विदेशी नियमों के तहत टेस्ट पास करते रहे हैं।
नया नियम अप्रैल माह से नए सत्र में लागू हो जाएगा। शनिवार को सोनीपत के निजी स्कूल साउथ प्वाइंट स्कूल में नेशनल बास्केटबॉल प्रतियोगिता का शुभारंभ करने पहुंचे सीबीएसई (स्पोर्ट्स) के ज्वाइंट डायरेक्टर पुष्कर वोहरा ने यह जानकारी दी।
वोहरा ने अमर उजाला के साथ खास बातचीत में बताया कि फिटनेस टेस्ट के लिए देशभर से उन बच्चों का डेटा मंगवा लिया गया है, जो विभिन्न खेलों में हिस्सा ले रहे हैं। इसके अलावा नए शैक्षणिक सत्र से सीबीएसई गेम्स में दो नए खेलों-कबड्डी और बॉक्सिंग को भी जोड़ा जाएगा। वोहरा ने बताया कि नए शैक्षणिक सत्र में गेम्स वेन्यू दो गुणा किए गए हैं और बजट भी तीन गुणा बढ़ाया गया है।
खेल कैलेंडर का फार्मेट बदला, तीन गुणा बजट
शैक्षणिक सत्र 2016-17 से सीबीएसई ने अपने खेल कलेंडर का फार्मेट भी बदला है। पहले जहां ब्वॉयज और गर्ल्स के इवेंट एक ही जगह होते थे, अब ये इवेंट्स अलग-अलग जगह होंगे। लगातार बढ़ रही प्रतिभागिता को देखते हुए यह फैसला लिया गया है। 2015-16 के शैक्षणिक सत्र में सीबीएसई ने देशभर की 172 वेन्यू पर गेम्स करवाए थे। आने वाले सत्र में 340 से अधिक वेन्यू पर सीबीएसई गेम्स होंगे। नए सत्र के लिए बजट पिछले सत्र के तीन करोड़ रुपये से तीन गुणा अधिक रखा गया है।
कॉमन यूनीक आईडी भी होगी शुरू
नए शैक्षणिक सत्र से बच्चों के लिए कॉमन यूनीक आईडी भी शुरू की जाएगी। अभी तक सीबीएसई हर एक बच्चे को एक आईडी देता था, जिसमें उसका पूरा रिकार्ड रहता था। इसी तरह की आईडी किसी खेल से जुड़े बच्चे को भी दी जाती थी। अब इन दोनों आईडी को मिक्स एक कॉमन यूनीक आईडी बनाई जाएगी, जिसके जरिए बच्चे की उसकी शैक्षणिक और खेल के मैदान दोनों तरह की उपलब्धियां ऑनलाइन होंगी।
स्पोर्ट्स में रिसर्च पर दिया जाए बल
पुष्कर वोहरा ने कहा कि स्पोर्ट्स और एकेडमिक को हमेशा अलग-अलग समझा जाता है, इसलिए हम मार खा जाते हैं। जब तक स्पोर्ट्स को एकेडिमक का हिस्सा नहीं मानेंगे, तब तक हम अन्य देशों के मुकाबले कमतर ही रहेंगे। वोहरा ने स्पोर्ट्स में भी रिसर्च पर बल देते हुए कहा कि जिस क्षेत्र में जो खेल लोकप्रिय है, उसी की एकेडमी क्षेत्र में खोलें, ताकि क्वालिटी स्पोर्ट्समैन निकले। पुष्कर वोहरा कहते हैं कि अगर सरकार इस मामले में सुपरविजन करें तो सब कुछ संभव है।
सुझाव: उद्योगपति या समर्थ व्यक्ति गोद लें एक खेल को
पुष्कर वोहरा ने सुझाव दिया कि सरकार के सांसद, विधायकों तथा अफसरों ने एक-एक गांव गोद ले रखा है। ऐसे ही अलग-अलग जिलों से या प्रदेशों से उद्योगपति, व्यापारी या साधन-संपन्न लोग आगे आएं और अपने-अपने क्षेत्र में एक-एक खेल को गोद लें। सरकार उन्हें इंफ्रास्ट्रक्टर दें और वे लोग खेल को उठाने के लिए काम करें। इसी के साथ वोहरा ने एक ही गेम लिस्ट को यूनिवर्सिटी और स्कूल लेवल दोनों में मान्यता देने का सुझाव भी दिया। उन्होंने बताया कि कई गेम्स स्कूल लेवल पर हैं, लेकिन यूनिवर्सिटी में उनका कोटा ही नहीं है। इस कारण कई बेहतरीन खिलाड़ी खो जाते हैं।