गढ़वाल विश्वविद्यालय में प्राइवेट फार्म बिक्री घोटाले की जांच कर रही सीबीसीआईडी टीम ने यहां विश्वविद्यालय के संबंधित विभागों के रिकार्ड की गहन जांच की।
कुछ जरूरी कागजात भी टीम ने कब्जे में लिए हैं। विभागीय अधिकारियों और कर्मचारियों से पूछताछ के बाद टीम सोमवार को लौट गई।
आरटीआई के तहत हुआ खुलासा
एचएन बहुगुणा गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय में 2002 से 2008 तक प्राइवेट फार्मों की बिक्री में करोड़ों का घोटाला प्रकाश में आया था। सोसाइटी फॉर रेवोल्यूशन अगेंस्ट करप्शन के महासचिव संतोष ममगांई ने आरटीआई के तहत सूचना मांगकर इसका खुलासा किया था।
मामले में विश्वविद्यालय स्टोर और करीब तीन दर्जन संबद्ध कालेज जांच के दायरे में हैं। दूसरे चरण की जांच को पहुंची सीबीसीआईडी टीम ने तीन दिनों तक यहां विश्वविद्यालय के परीक्षा विभाग, स्टोर और लेखा अनुभाग में आवश्यक रिकार्ड को खंगाला। विश्वविद्यालय के अधिकारी और कर्मचारी आवश्यक ब्योरा तैयार करने को लेकर खासे परेशान रहे।
क्या था मामला
2002 से 2008 तक विश्वविद्यालय के प्राइवेट फार्मों की बिक्री में करोड़ों के घोटाले का खुलासा हुआ था। इसमें विश्वविद्यालय स्टोर में 42 लाख और 32 संबद्ध कालेजों एवं संस्थानों में 2.35 करोड़ की हेराफेरी प्रकाश में आई थी।
बाद में कालेजों से 22 लाख की रिकवरी कर ली गई थी। जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई नहीं होने पर आरटीआई कार्यकर्ता संतोष ममगांई ने हाईकोर्ट की शरण ली। फिर 12 मई को हाईकोर्ट के आदेश पर विश्वविद्यालय ने कार्रवाई करते हुए अज्ञात के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करवाई।