शिक्षण संस्थानों में सिक्योरिटी फीस के नाम पर ली जा रही ‘कॉशन मनी’ वापस न होने से छात्र-छात्राओं का नुकसान हो रहा है। कॉशन मनी वापस करने की जिम्मेदारी शिक्षण संस्थान की ही है।
राजधानी के कॅरिअर डेंटल कॉलेज के एक मामले में जिला उपभोक्ता फोरम ने संस्थान को इस रिफंडेबल फीस को वापस न करने का दोषी माना है। साथ ही संस्थान को कॉशन मनी वापस करने का निर्देश दिया है।
जिला उपभोक्ता फोरम-1 में विशालखंड गोमती नगर निवासी श्वेता जैन ने मामले की शिकायत दर्ज कराई थी। कॅरिअर इंस्टीट्यूट ऑफ डेंटल साइंसेज एंड हॉस्पिटल में बीडीएस की छात्रा रही श्वेता ने बताया कि वर्ष 2002 में प्रवेश के समय उसने कॉशन मनी के 30,000 रुपये जमा किए।
वर्ष 2007 में कॉलेज ने उसे सर्टिफिकेट तो दिया, लेकिन कॉशन मनी नहीं दी। उसने कई बार आवेदन किया लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। निराश होकर छात्रा ने 3 नवंबर 2010 को कॉलेज को लीगल नोटिस भी भेजा।
18 जुलाई 2011 को कॉशन मनी वापस करने से मना करने पर श्वेता ने उपभोक्ता फोरम में शिकायत की।
शिकायत के खिलाफ कॉलेज प्रबंधन का कहना था कि छात्रा ने खुद कॉशन मनी वापस लेने की कोशिश नहीं की।
इस पर विजय वर्मा की अध्यक्षता वाली फोरम का कहना था कि इस बात का कोई औचित्य दिखाई नहीं देता कि परिवादी कॉशन मनी प्राप्त करने का प्रयास न करे।
इस काम के लिए उसे विपक्षी को कानूनी नोटिस भी देना पड़ा। जबकि कॉलेज को यह फीस खुद वापस करनी चाहिए थी। फोरम ने कॉलेज प्रबंधन को 30,000 रुपये कॉशन मनी 9 प्रतिशत ब्याज के साथ अदा करने का निर्देश दिया है।
इसके साथ ही छात्रा को शारीरिक और मानसिक कष्ट के लिए 5,000 रुपये और वाद व्यय के लिए 2,000 रुपये अदा करने होंगे। कॉलेज को यह राशि एक महीने के भीतर वापस करनी होगी।