उत्तराखंड सरकार की होनहारों को प्रोत्साहन देने की योजना बजट न मिलने की वजह से अटकी है।
योजना के तहत हर साल आईआईटी, आईआईएम और एनआईटी में दाखिला पाने वाले सूबे के होनहारों को प्रति छात्र 50 हजार रुपये की पुरस्कार राशि देने की घोषणा की गई थी। बीते तीन साल में गत वर्ष इसमें से 90 लाख रुपये का पुरस्कार 184 छात्रों को दिया गया था लेकिन अभी इस कतार में प्रदेश के 284 होनहार खड़े हैं।
राज्य सरकार ने वर्ष 2013 में प्रदेश के उन होनहारों को पुरस्कृत करने की घोषणा की थी, जो कि अपनी काबिलियत के दम पर इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (आईआईटी), इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट (आईआईएम) और नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (एनआईटी) में दाखिला पाएंगे। इसके तहत उत्तराखंड तकनीकी विवि को नोडल एजेंसी बनाया गया था।
विवि ने पहले ही चरण में ऐसे होनहारों के आवेदनों के आधार पर प्रदेश सरकार से करीब पांच करोड़ बजट की डिमांड रखी। सरकार ने प्रस्ताव लटकाए रखा। दो साल बाद 18 अगस्त 2015 को सूबे के ऐसे 184 होनहारों को 92 लाख रुपये की पुरस्कार राशि बांटी गई।
आईआईटी में वर्ष 2012 और 2013 में एडमिशन हासिल करने वाले 39, एनआईटी में एडमिशन लेने वाले 133 और आईआईएम में एडमिशन लेने वाले 12 छात्रों को प्रति छात्र 50 हजार रुपये का पुरस्कार दिया गया। इनमें से काफी छात्र ऐसे थे जो कि पुरस्कार राशि से वंचित रह गए थे।
इसके बाद तकनीकी विवि ने शासन को दोबारा प्रस्ताव भेजा, जिसमें 284 होनहारों के लिए ऐसे बजट की मांग रखी गई। बावजूद शासन से 23 लाख 20 हजार रुपये का बजट जारी किया गया। बजट न आने की वजह से सरकार की यह योजना युवाओं के लिए फायदेमंद होने के बजाए सिरदर्द साबित हो रही है।
योजना के तहत प्रथम चरण में कम बजट आया था। उस वक्त काफी छात्र वंचित रह गए थे। दोबारा विवि ने प्रस्ताव भेजा तो अब कुछ बजट आया हुआ है। इसे बांटने के लिए जल्द बैठक की जाएगी। बावजूद अभी 284 छात्र कतार में हैं।
- प्रो. विजय जुयाल, कुलसचिव तकनीकी विवि
हमने शासन को जो प्रस्ताव भेजा था, उसके मुताबिक अभी 23 लाख 20 हजार रुपये का बजट आया है। इस बजट से केवल 46 छात्रों को ही पुरस्कार राशि मिल पाएगी। शासन से अभी और बजट मिलने की उम्मीद है। इसके बाद आगे पुरस्कार राशि बांटी जाएगी। इस वक्त 284 छात्रों के आवेदन कतार में हैं।
- गणेश, सहायक लेखाकार, तकनीकी विवि