लखनऊ विश्वविद्यालय सहित विभिन्न कॉलेजों में प्रवेश प्रक्रिया के दौरान देखने में आ रहा है कि अभ्यर्थियों का रुझान बीए से अधिक बीएससी व बीकॉम में है।
बीए के लिए आने वाले आवेदन अन्य विषयों की तुलना में कहीं कम हैं।
बहुत से अभ्यर्थियों का तो यह तक कहना है कि बीए के बाद रोजगार के अवसर बहुत कम हैं जबकि हकीकत इससे कहीं अलग है।
बीए की डिग्री किसी भी मायने में अन्य ट्रेडिशनल कोर्स से कम नहीं।
एक्सपर्ट्स भी मानते हैं कि बीए करने के बाद न सिर्फ सिविल सर्विसेज बल्कि विभिन्न प्राइवेट और सरकारी नौकरियों के ढेरों अवसर मौजूद हैं। बस जरूरत है तो प्रवेश के समय सही विषय को कॉम्बिनेशन में शामिल करने की।
इतना ही नहीं यदि बीए के प्रैक्टिकल विषयों को अपने कॉम्बीनेशन में शामिल किया जाए तो यह अवसर और भी बढ़ जाते हैं।
नेशनल पीजी कॉलेज के आर्ट्स फैकल्टी के इंचार्ज डॉ. पीके खत्री के मुताबिक साइंस स्ट्रीम के स्टूडेंट्स अधिकतर डॉक्टर या इंजीनियर बनते हैं जबकि आर्ट्स के पास भी बहुत से विकल्प हैं।
सिविल सर्विसेज के परिणामों को देखा जाए तो उसमें भी आर्ट्स विषय से उत्तीर्ण अभ्यर्थियों की संख्या काफी अधिक रहती है।
समस्या ये है कि समाज में कुछ लोग इस विषय के महत्व को नहीं समझते और बच्चों को भी वैसा ही बताते हैं। इसीलिए इसमें स्टूडेंट्स का रुझान कम रहता है।
आर्ट्स के सभी विषय ऐसे हैं जिनमें अच्छे अवसर हैं लेकिन यदि अपने सब्जेक्ट कॉम्बिनेशन में किसी प्रैक्टिकल विषय को जोड़ लिया जाए तो कॅरिअर के लिए लिहाज से और बेहतर हो जाता है।