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OMG: उत्तराखंड में बीटेक की 10 हजार सीटें खाली

Thu, 20 Aug 2015 01:41 PM IST
आफताब अजमत/ अमर उजाला, देहरादून
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उत्तराखंड में बीटेक की करीब 10 हजार सीटें खाली हैं। दो दौर की काउंसिलिंग खत्म होने के बावजूद प्रदेश की 12 हजार सीटों में से महज 1845 सीटों पर ही दाखिले हो पाए हैं।
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बीते तीन वर्षों में इस साल प्रदेश के बीटेक कॉलेजों का हाल सबसे बुरा है। इससे इंजीनियरिंग के प्रति युवाओं के क्रेज और प्रदेश में बीटेक कॉलेजों की व्यवस्थाओं पर भी सवाल उठने लगे हैं।

एक लाख 20 हजार से ज्यादा जेईई स्टेट रैंक वाले छात्रों के बीच से उत्तराखंड तकनीकी विवि के कॉलेजों में महज 1845 सीटों पर दाखिले होने से साफ है कि कॉलेजों का बुरा दौर शुरू हो चुका है। बीते तीन साल में तीन इंजीनियरिंग कॉलेज बंद हो चुके हैं।
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कई और कॉलेज बंदी के कगार पर हैं। कुछ कॉलेजों ने अस्तित्व बचाने के लिए कई नए कोर्स इसी साल शुरू किए हैं। इस बार हुई काउंसिलिंग के पहले राउंड में 1343 बीटेक सीटों पर दाखिले हुए थे। दूसरे राउंड में महज 502 दाखिले हुए हैं।

बीते साल भी दो राउंड के बाद 12500 में से केवल 5000 सीटें ही भर पाईं थी। वर्ष 2013 में काउंसिलिंग के बाद 4630 सीटें और वर्ष 2012 में 5500 सीटों पर दाखिले हुए थे।

ये कॉलेज हो चुके बंद
- हर्म्स कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग
- सेलाकुई इंस्टीट्यूट ऑफ हायर एजूकेशन
- दून इंजीनियरिंग कॉलेज (खुद सीटें सरेंडर कर दी)

क्यों गिरा इंजीनियरिंग का ग्राफ
तकनीकी शिक्षा विशेषज्ञ डॉ. एम सिंघल के मुताबिक कॉलेजों में इन्फ्रास्ट्रक्चर की भारी कमी है। कुछ नामी तकनीकी संस्थानों को छोड़ दें तो कॉलेजों में न तो फैकल्टी को सही पेमेंट किया जाता है और न काबिल फैकल्टी पर जोर दिया जाता है। तकनीकी संस्थानों के हाल तो इससे भी बुरे हैं।

यहां पढ़ने वाले छात्र ही अपने जूनियर छात्रों के लिए शिक्षक की भूमिका निभाते हैं। तमाम ऐसे मामले भी सामने आ चुके हैं, जिनमें तकनीकी संस्थानों का इन्फ्रास्ट्रक्चर कागजी नजर आया है। शोध कार्यों में भी तकनीकी संस्थान बेहद पिछड़े हैं।

सीटें ज्यादा, छात्र कम
गत कुछ वर्षों में इंजीनियरिंग कॉलेजों की संख्या में बेतहाशा बढ़ोत्तरी हुई है। इसके मुकाबले में प्रदेश में छात्रों की संख्या वहीं तक सीमित है। विशेषज्ञों का तर्क है कि प्रदेश में अभी भी 6500 तक की सीटों की ही डिमांड है। इससे ऊपर की करीब 6500 सीटें पहले ही अधिक हैं।

देर से शुरू हुई काउंसिलिंग भी बनी वजह
कॉलेजों में इतने भारी सन्नाटे के पीछे वजह प्रदेश में देरी से शुरू हुई बीटेक काउंसिलिंग भी है। उत्तराखंड में तमाम विश्वविद्यालयों में इंजीनियरिंग के दाखिले खत्म होने के बाद यूटीयू की बीटेक काउंसिलिंग शुरू हुई।

यह काउंसिलिंग जेईई मेंस के स्कोर पर होनी थी और यह स्कोर विवि को विलंब से मिला, इसलिए काउंसिलिंग भी देरी से 15 जुलाई से शुरू हो पाई। जब तक काउंसिलिंग शुरू हुई, तब तक प्रदेश के तमाम होनहार दूसरे इंजीनियरिंग विवि में दाखिला ले चुके थे। बीते मंगलवार को ही यूटीयू की दूसरे राउंड की बीटेक काउंसिलिंग खत्म हुई है।

निश्चित तौर पर सीटें कम भरी हैं। यह कॉलेजों और विवि के लिए चिंता का विषय है। अब शासन को पत्र भेजेंगे ताकि कॉलेजों को 12वीं पास छात्रों को सीधे दाखिला देने की अनुमति मिल जाए।
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- डॉ. आशीष उनियाल, परीक्षा नियंत्रक, उत्तराखंड तकनीकी विवि
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