प्रदेश में इंजीनियरिंग के बाद बैचलर आफ एजूकेशन(बीएड) भी बुरे दौर से गुजर रहा है। जिन कॉलेजों में कभी दाखिले के लिए लंबी लाइन लगती थी, वहां अब सन्नाटा पसरा हुआ है।
स्थिति यह है कि गढ़वाल विवि से संबद्ध कालेजों में 65 प्रतिशत सीटें खाली हैं। यही हाल श्रीदेव सुमन विवि से जुड़े कालेजों में भी है।
तीन हजार सीटें खाली
गढ़वाल विवि से संबद्ध कॉलेजों में बीएड की करीब पांच हजार सीटें हैं। गढ़वाल विवि ने अपने तीनों परिसरों के लिए काउंसिलिंग कराई तो करीब 90 प्रतिशत सीटें भर गई, लेकिन संबद्ध कॉलेजों में ऐसा नहीं हुआ। इन कॉलेजों में करीब तीन हजार सीटें खाली हैं।
दूसरी ओर, श्रीदेव सुमन उत्तराखंड विवि से संबद्ध 26 बीएड कॉलेजों में सरकारी कोटे की 1320 सीटें हैं। दो सप्ताह पहले हुई काउंसिलिंग में महज 292 सीटें ही भर पाईं। विवि के कुलसचिव प्रो. एके तिवारी का कहना है कि जल्द ही दूसरे चरण की काउंसिलिंग का शेड्यूल जारी किया जाएगा।
रूझान हुआ कम
गढ़वाल विवि से संबद्ध कॉलेजों के संगठन एसोसिएशन आफ सेल्फ फाइनेंस इंस्टीट्यूट के चेयरमैन सुनील अग्रवाल का कहना है कि गत वर्ष की तुलना में इस बार बीएड का रुझान कम है।
सभी कॉलेजों ने गढ़वाल विवि से ही एडमिशन कराने की मांग की थी लेकिन विवि केवल अपने परिसर के लिए ही काउंसिलिंग कराता है। इस वजह से उन्हें खुद ही काउंसिलिंग कर सीट भरनी पड़ती है।