यूपी बोर्ड की लापरवाही का खामियाजा राजधानी के एक लाख, 12 हजार, 697
स्टूडेंट्स को भुगतना पड़ रहा है।
परीक्षाएं शुरू होने में 12 दिन शेष हैं
लेकिन अब तक स्टूडेंट्स को न ही परीक्षा केंद्रों का पता है और ना ही रोल
नंबर मिले हैं।
परीक्षा से पहले स्टूडेंट्स का जो समय कोर्स का रिवीजन करने
में बीतना चाहिए उस समय में वे रोल नंबर और परीक्षा केंद्र तलाश रहे हैं।
यूपी
बोर्ड हाईस्कूल और इंटरमीडिएट परीक्षाएं तीन मार्च से शुरू होनी हैं। यूपी
बोर्ड के नियमों के अनुसार बालिकाओं को स्वकेंद्र की सुविधा मिलती है,
जबकि बालकों का केंद्र दूसरे स्कूलों में भेजा जाता है।
बोर्ड की ओर से
सेंटर भेजने संबंधी पूरा ब्यौरा शिफ्टिंग सूची में होता है। आमतौर पर बोर्ड
की ओर से शिफ्टिंग सूची परीक्षा शुरू होने से करीब एक महीने पहले जारी कर
दी जाती है पर इस बार ऐसा नहीं हुआ।
15 दिनों के लिए उमेश त्रिपाठी के निरीक्षक का पद संभाले जाने के समय परीक्षा केंद्रों में काफी
परिवर्तन किया गया था। ऐसे में बोर्ड की ओर से सूची सार्वजनिक न होने के
कारण स्थिति साफ नहीं हो रही है।
बहरहाल, कॉलेज प्रबंधक और प्रिंसिपल अपने
विद्यालय का परीक्षा केंद्र जानने के लिए रोजाना शिक्षा भवन के चक्कर लगा
रहे हैं।
इसी तरह इंटरमीडिएट कक्षाओं के रोल नंबर तो प्रैक्टिकल के चलते
जारी हो गए थे लेकिन प्रवेश पत्र अभी तक नहीं मिला।
दूसरी ओर हाईस्कूल के
परीक्षार्थियों को रोल नंबर और प्रवेशपत्र दोनों की ही जानकारी नहीं है।