थोक कीमतों पर आधारित (डब्लूपीआई) महंगाई का आंकड़ा लगातार चौथे महीने की गिरावट के साथ जनवरी में तीन साल के सबसे निचले स्तर 6.62 फीसदी पर दर्ज किया गया। आंकड़े में इस गिरावट के बावजूद खाने-पीने की चीजों की कीमतों में जारी तेजी के चलते आम आदमी को कोई राहत मिलती नजर नहीं आ रही है।
बृहस्पतिवार को सरकार की ओर से जारी मूल्य सूचकांक आधारित महंगाई दर दिसंबर के 7.18 फीसदी से घटकर जनवरी में 6.62 फीसदी पर आ गई। हालांकि, इस दौरान सब्जियों, प्याज और चावल के दामों में बढ़ोतरी दर्ज की गई। कारखाने में बनने वाले सामान (विनिर्मित वस्तुओं) की महंगाई की दर जनवरी में घटकर 4.81 फीसदी पर आ गई।
थोक मूल्य सूचकांक में 14.3 फीसदी की हिस्सेदारी रखने वाली खाद्य वस्तुओं की महंगाई दर बढ़कर 11.88 फीसदी हो गई, जो दिसंबर में 11.16 प्रतिशत पर थी। इस पर सबसे ज्यादा असर प्याज के दाम में बढ़ोतरी का पड़ा। जनवरी में प्याज का थोक मूल्य सालाना आधार पर 111.52 फीसदी ऊपर रहा।
इस दौरान चावल 17.31 प्रतिशत महंगा हुआ, जबकि सब्जियों के दाम 28.45 फीसदी की सालाना बढ़त पर रहे। आलू 79.07 और दालें 16.89 महंगी हुईं। जनवरी में गेहूं और मोटे अनाज की महंगाई दर क्रमश: 21.39 और 18.09 फीसदी रही। दूध 4.47 और फल 8.42 फीसदी महंगे हुए। हालांकि, ईंधन और बिजली वर्ग की महंगाई दर जनवरी में घटकर 7.06 फीसदी पर आ गई, जोकि दिसंबर, में 9.38 फीसदी पर थी।
अर्थशास्त्रियों का कहना है कि थोक महंगाई में गिरावट भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) और बैंकिंग सेक्टर के लिए राहत की बात है क्योंकि यह आरबीआई को मौद्रिक नीति में सख्ती की ओर मुड़ने से रोक सकता है। आरबीआई ने बीते माह अपनी मौद्रिक समीक्षा में मार्च अंत तक महंगाई दर 6.8 फीसदी के स्तर पर रहने का अनुमान जताते हुए नीतिगत ब्याज दरों में 0.25 फीसदी की कटौती थी।