कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के दखल के बाद सोने पर केंद्र सरकार के सुर बदलने लगे हैं। वित्त मंत्री पी.चिदंबरम ने मार्च के आखिर तक सोने के आयात पर सख्ती घटाने के संकेत दिए हैं।
उद्योग जगत काफी दिनों से इन पाबंदियों को हटाने की मांग कर रहा है। पिछले सप्ताह सोनिया गांधी ने वाणिज्य मंत्रालय को पत्र लिखकर सोने के आयात पर सख्ती घटाने की पैरवी की थी। इससे पहले भाजपा के पीएम उम्मीदवार नरेंद्र मोदी भी सोने की बढ़ती तस्करी पर निशाना साध चुके हैं।
सोमवार को अंतरराष्ट्रीय कस्टम दिवस के मौके पर चिदंबरम ने कहा कि इस वर्ष के आखिर तक सोने के आयात पर लगी कुछ पाबंदियों पर दोबारा विचार किया जाएगा। लेकिन ऐसा तभी संभव है जब चालू खाते के घाटे के मामले में स्थिति पूरी तरह काबू में आ जाए। बाद में वित्त सचिव सुमित बोस ने बताया कि यह समीक्षा मार्च के आखिर तक हो सकती है।
बाहर से नहीं आ पा रहा था सोना
फिलहाल सोना पर 10 फीसदी इंपोर्ट ड्यूटी है, जबकि इसका आयात 20 फीसदी आभूषण निर्यात की शर्त पर होता है।
इन पाबंदियों के चलते सोने का आयात मई में 162 टन से घटकर नवंबर में 19.3 टन पर आ गया है। हालांकि, चिदंबरम ने दीर्घ अवधि में आयात पर अंकुश के बजाय निर्यात बढ़ाने की नीति अपनाने पर जोर दिया है।
चिदंबरम ने स्वीकार किया कि हर महीने देश में करीब 1-3 टन सोना तस्करी के जरिए आ रहा है। लेकिन सोने के आयात और चालू खाते के घाटे पर अंकुश लगाने के लिए आयात पर सख्ती बढ़ाने के अलावा कोई रास्ता नहीं था।
बढ़ेगा सरकार और ज्यादा घाटा!
वित्त मंत्रालय के अधिकारियों का कहना है कि सोने की तस्करी इससे कहीं ज्यादा है।
चालू वित्त वर्ष के दौरान केंद्र सरकार अप्रत्यक्ष करों के तौर पर 5.65 लाख करोड़ रुपये के लक्ष्य से चूक सकती है। सरकार पहले ही सीमा शुल्क के अनुमानित लक्ष्य को कम कर चुकी है।
कस्टम और सेंट्रल एक्साइज विभाग से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि 5 फीसदी की दर से बढ़ती अर्थव्यवस्था के राजस्व में 20 फीसदी बढ़ोतरी हासिल करना मुश्किल है।