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टैक्स बचाने के अनोखे फंडे, आप भी अपनाएं

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हम हर चीज में बेहतर पाना चाहते हैं। जिस तरह हम हमेशा अच्छा खाना, कपड़ा, घर, कार आदि की चाहत रखते हैं, ठीक वैसा ही नजरिया हम निवेश के लिए रखते हैं। जब भी हम निवेश के विकल्प तलाशते हैं, तो हमारी कोशिश बेस्ट इंस्ट्रूमेंट्स का चयन करने की ही रहती है।
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म्यूचुअल फंड भी एक ऐसा ही निवेश विकल्प और इंस्ट्रूमेंट है, जिसे निवेशक एक अच्छे विकल्प के रूप में देखता है। लेकिन, म्यूचुअल फंड में ‘बेस्ट’ क्या है, इसमें निवेश शुरू करने से पहले यह जानना और समझना जरूरी है। मेरा मानना है कि बेस्ट से सीधा तात्पर्य निवेशक की व्यक्तिगत जरूरतें, लक्ष्य और उसके जोखिम उठाने की क्षमता से है। 2014 में निवेश के लिए अपना बेस्ट म्यूचुअल फंड चुनने से पहले कुछ मानदंडों पर उसे जरूर परख लें।

म्यूचअल फंड से आय पर देना होता है टैक्स

परफार्मेंस रैंकिंग
म्यूचुअल फंडों की रैंकिंग उनके प्रदर्शन के आधार पर चार क्वार्टाइल में की जाती है। बेहतरीन प्रदर्शन वाले फंड पहली क्वार्टाइल में होते हैं। जबकि कमतर प्रदर्शन वाले फंड क्रमशः दूसरी, तीसरी और चौथी क्वार्टाइल में होते हैं। अच्छे रिटर्न के लिए पहली क्वार्टाइल के फंडों में निवेश करना बेहतर है।

रेशियो एनालिसिस
रेशियो एनालिसिस से म्यूचुअल फंड के अल्फा, स्टैंडर्ड डेविएशन रिटर्न और उसमें निहित जोखिम का पता चलता है। अल्फा से मतलब उस अतिरिक्त रिटर्न से होता है, जिसे फंड मैनेजर ने बेंचमार्क रिटर्न से अधिक जेनरेट किया है। जबकि, स्टैंडर्ड डेविएशन फंड अस्थिरता और जोखिम को बताता है।

फंड मैनेजर का अनुभव

फंड मैनेजर कितने समय से फंड मैनेज कर रहा है, यह जानना निवेश के दृष्टिकोण से बेहद जरूरी है। फंड मैनेजर के काम करने की अवधि से उसके अनुभव का पता चलता है। इससे निवेशकों को यह समझने में आसानी होती है कि उसका निवेश किसी नौसिखिये के हाथ में है या किसी अनुभवी के पास।

फंड मैनेजर का अनुभव अधिक रिटर्न हासिल करने में मददगार साबित हो सकता है। फंड मैनेजर में हाल में हुए बदलाव निवेशक को फंड के भविष्य में प्रति सावधान करते हैं।

एक्सपेंस रेशियो और स्कीम एसेट साइज
फंड पर अधिक खर्च से सीधा मतलब कम रिटर्न से है लेकिन एक्सपेंस रेशियो स्कीम एसेट साइज के मुताबिक तय होता है। बाजार नियामक सेबी ने एक्सपेंस रेशियो पर प्रतिबंध लगाए है, जिसके तहत यह फंड की एसेट साइज के अनुसार तय होगा। यदि एसेट साइज यानी निवेश अधिक है तो उस पर प्रबंधन खर्च कम होगा। हालांकि, यदि फंड मैनेजर अनुभवी है और फंड लगातार बेहतर प्रदर्शन कर रहा है तो एक्सपेंस रेशियो का कोई मतलब नहीं रह जाता। लेकिन एसेट साइज का बड़ा होना हमेशा बेहतर माना जाता है।

आयकर अधिनियम की धारा 80सी के तहत प्रत्येक निवेशक एक लाख रुपये तक की टैक्स बचत कुछ विशेष योजनाओं में निवेश के जरिए कर सकता है। इनमें म्यूचुअल फंड स्कीम भी शामिल है। इक्विटी लिंक्ड सेविंग स्कीम (ईएलएसएस) इक्विटी आधारित एक ऐसी ही म्यूचुअल फंड स्कीम है, जिसमें निवेशकों को धारा 80सी के तहत कर छूट का लाभ मिलता है।

ईएलएसएस के तहत निवेशक एक लाख रुपये तक के निवेश पर कर छूट का लाभ प्राप्त कर सकते हैं। इसमें तीन साल की लॉक इन अवधि होती है। ईएलएसएस को बैंक, डिस्ट्रीब्यूशन हाउसेज, ब्रोकर या एजेंट के अलावा सीधे फंड हाउस या उनकी वेबसाइट से खरीदी जा सकती है। अन्य दूसरी म्यूचुअल फंड स्कीमों की तरह ईएलएसएस में निवेशकों को एंट्री लोड नहीं देना पड़ता है।

डिविडेंड डिस्ट्रीब्यूशन टैक्स (डीडीटी)

धारा 10(35) के तहत म्यूचुअल फंड की यूनिटों से यूनिट धारक (निवेशक) को प्राप्त होने वाली आमदनी टैक्स मुक्त होती है और उस पर कोई टीडीएस (टैक्स डिडक्शन एट सोर्स) नहीं काटा जाता है। लेकिन, इक्विटी फंड या डेट फंड के जरिए डिविडेंड (लाभांश) के रूप में होने वाली आमदनी डिविडेंड डिस्ट्रीब्यूशन टैक्स (डीडीटी) के दायरे में आती है।

यानी, यूनिट धारक को मिलने वाला लाभांश डीडीटी काटकर दिया जाता है। सभी इक्विटी आधारित योजनाएं जैसे इक्विटी-डायवर्सिफाइड, लॉर्ज कैप, मिड कैप, स्मॉल कैप इक्विटी फंड, थीमेटिक एंड सेक्टोरियल स्कीम आदि पर यूनिट धारक को मिलने वाला लाभांश टैक्स फ्री होता है और उस पर डीडीटी नहीं देना होता है।

दूसरी ओर, नॉन इक्विटी स्कीम जैसे डेट फंड, इनकम फंड, लिक्विड फंड, अल्ट्रा शार्ट टर्म फंड, फ्लोटिंग रेट फंड, गिल्ट फंड, मंथली इनकम प्लान (एमआईपी) और फिक्स्ड मैच्योरिटी प्लान के जरिए प्राप्त होने लाभांश पर हिंदू अविभाजित परिवार (एचयूएफ) के लिए कुल 28.325 फीसदी की दर से डीडीटी की कटौती होती है। इसमें 25 फीसदी डीडीटी, 10 फीसदी सरचार्ज और तीन फीसदी सेस शामिल होता है। एचयूएफ के अलावा अन्य दूसरे यूनिट धारक के लिए लाभांश की आय पर 33.99 फीसदी की दर से डीडीटी देय होता है।

सिक्यूरिटी ट्रांजेक्शन टैक्स (एसटीटी)

सिक्यूरिटी ट्रांजेक्शन टैक्स (एसटीटी)
म्यूफंड में इक्विटी आधारित फंड की प्रति यूनिट बिक्री पर एसटीटी देना पड़ता है। विक्रेता को डिलीवर होने वाली यूनिट की बिक्री पर 0.001 फीसदी की दर से एसटीटी और गैर डिलीवरी यूनिट की बिक्री पर 0.025 फीसदी की दर से एसटीटी देना होता है।

राजीव गांधी इक्विटी सेविंग स्कीम
राजीव गांधी इक्विटी सेविंग स्कीम (आरजीईएसएस) के तहत निवेशक को आयकर अधिनियम की धारा 80सीसीजी के तह करछूट का लाभ मिलता है। आरजीईएसएस के तहत इक्विटी में पहली बार निवेश करने वाले खुदरा निवेशकों को, जिनकी वित्तीय वर्ष में सकल आय 12 लाख रुपये या उससे कम है, धारा 80सीसीजी के तहत निवेश की गई राशि का 50 फीसदी कर छूट मिलता है। जैसे, यदि किसी निवेशक ने आरजीईएसएस के तहत 50,000 रुपये का निवेश किया है, तो उसे 25,000 रुपये कर कटौती का लाभ मिलेगा। यह कर छूट धारा 80सी के तहत मिलने वाले एक लाख रुपये की छूट सीमा के अतिरिक्त मिलेगी।
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कैपिटल गेन टैक्स

म्यूचुअल फंड स्कीमों से होने वाले कैपिटल गेन (पूंजीगत लाभ) पर टैक्स की गणना निवेश की अवधि के अनुसार तय की जाती है। यदि निवेशक म्यूचुअल फंड यूनिट को 12 महीने के बाद रिडीम कराता है, तो इससे होने वाले गेन पर लांग टर्म कैपिटल गेट टैक्स की देयता बनेगी, जबकि यदि यूनिट 12 महीने से पहले रिडीम करा ली जाती है, तो ऐसे में शार्ट टर्म कैपिटल गेन टैक्स का मामला बनता है।

डेट स्कीमों पर शार्ट टर्म कैपिटल गेन टैक्स निवेशक को सामान्य आयकर स्लैब के अनुसार देना होता है। वहीं, लांग टर्म कैपिटल गेन टेक्स इंडेक्स फंड पर 20 फीसदी और अन्य पर 10 फीसदी की दर से देय है। इक्विटी योजनाओं पर शार्ट टर्म कैपिटल गैन टैक्स 15 फीसदी की दर से लगता है जबकि इन स्कीम में लांग टर्म कैपिटल गेन कर मुक्त होता है।
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