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सौर ऊर्जा से बिजली के मामले में आत्मनिर्भर एक गांव

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जहानाबाद का एक गांव धरनई ऊर्जा के मामले में आत्मनिर्भर हो गया है। रविवार को एक समारोह में गीनपीस ने धरनई में सौर ऊर्जा चालित एक माइक्रोग्रिड की औपचारिक शुरूआत की।
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इस विकेंद्रीकृत माइक्रोग्रिड की उत्पादन क्षमता करीब 100 किलोवॉट है और यह अनूठा मॉडल 2,400 की आबादी वाले धरनई को गुणवत्तापूर्ण और किफायती बिजली मुहैया करा रही है। धरनई निवासी कमल किशोर इस बारे में बताते हैं कि जब हमारा देश विकास के रास्ते पर तेज गति से कुलांचे भर रहा था, तब हम धरनई वासियों की जिंदगी पिछले 30 वर्षों में मानों ठहर गई थी।

हमने बिजली हासिल करने के लिए ढेरो कोशिशें की। हम केरोसिन तेल से जलने वाले ढिबरी से लेकर महंगे डीजल जेनरेटर पर निर्भर रहने को विवश थे। लेकिन अब हम गर्व से कह सकते हैं कि धरनई अभिनव प्रयोग के मामले में एक लीडर बन गया है। हमने अपनी पहचान ऊर्जा के मामले में एक आत्म निर्भर गांव के रूप मे स्थापित कर ली है और देश के विकास के साथ कदम मिला सकते हैं।
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धरनई में करीब 3 करोड़ की लागत से यह माइक्रो ग्रिड उद्यम स्थापित हुआ है। अपनी तरह का यह इकलौता विकेंद्रीकृत अक्षय ऊर्जा मॉडल करीब 450 घर परिवारों तथा 50 दुकानों व व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को चौबीसों घंटे व सातों दिन स्वच्छ, किफायती बिजली उपलब्ध करा रहा है।

इसके तहत 70 किलोवॉट क्षमता से जहां रोजमर्रा के लिए बिजली पैदा की जा रही है वहीं 30 किलोवॉट में प्रत्येक 3 हार्सपावर क्षमता वाले 10 सोलर पंपों से खेतों की सिंचाई हो रही है।
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