जानबूझ कर्ज न चुकाने वाली कंपनियों के लिए आने वाले दिन अच्छे नहीं रहने वाले हैं। ऐसी कंपनियों पर शिकंजा बढ़ाने के लिए मंगलवार को भारतीय रिजर्व बैंक ने विलफुल डिफॉल्टर के नियमों को और सख्त कर दिया है। रिजर्व बैंक के अनुसार ऐसी कंपनियां जो कि जानबूझ कर कर्ज नहीं चुका रही है, उनके अलावा उस कंपनी के समूह और प्रबंधन को भी बैंक विलफुल डिफॉल्टर घोषित कर सकेंगे। साथ ही बैंक कर्ज न चुकाने पर कंपनी के कर्ज की गारंटी लेने वालेे गारंटर को भी डिफॉल्टर घोषित कर सकेंगे।
50 बड़े डिफॉल्टरों के पास बैंकों का करीब 40 हजार करोड़ फंसा रिजर्व बैंक द्वारा विलफुल डिफॉल्टर पर जारी स्पष्टीकरण में कहा गया है कि समूह की कंपनी जो कि डिफॉल्ट कर रही है, और उसकी गारंटी उसी समूह की किसी कंपनी द्वारा ली गई है, तो गारंटी देने वाली कंपनी को भी विलफुल डिफॉल्टर बैंक घोषित कर सकेंगे। इसी तरह बैंक विलफुल डिफॉल्ट करने वाली कंपनी के प्रबंधन के तहत काम करने वाले निदेशक को भी डिफॉल्टर घोषित कर सकेंगे।
देश के 50 बड़े डिफॉल्टरों के पास बैंकों का करीब 40 हजार करोड़ फंसा हुआ है। हाल ही में यूनाइटेड बैंक ऑफ इंडिया ने किंगफिशर एयरलाइंस को विलफुल डिफॉल्टर घोषित किया है। जिसके बाद आईडीबीआई , पीएनबी सहित दूसरे बैंक कंपनी की विलफुल डिफॉल्टर घोषित करने की तैयारी में हैं। विलफुल डिफॉल्टर घोषित होने के बाद कंपनी के प्रमोटर के लिए दूसरी कंपनियों मेंं डायरेक्टर रहना न केवल मुश्किल हो जाता है, बल्कि उसकी और उससे जुड़ी कंपनियों को भी बैंक से कर्ज मिलना नामुमकिन हो जाता है।