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एटीएम प्रबंधन सुधारने के लिए नियमों में सख्ती जरूरी

Mon, 13 Oct 2014 08:49 AM IST
नई दिल्ली/ एजेंसी
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एटीएम में नकदी के बेहतर प्रबंधन के लिए इंडियन बैंक्स एसोसिएशन ने भारतीय रिजर्व बैँक (आरबीआई) को सुझाव दिया है कि इस काम को करने वाली कंपनियों के लिए सख्ती के साथ न्यूनतम नेटवर्थ संबंधी नियम लागू किए जाएं। आईबीए ने अपनी एक रिपोर्ट में आरबीआई को यह सुझाव दिया है।
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रिपोर्ट में आईबीए ने कहा है कि बैंकों को एटीएम के लिए रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल (आरएफपी) के समय से ही न्यूनतम नेटवर्थ संबंधी मानकों का पालन जरूरी किया जाना चाहिए। इसके तहत निर्धारित मानदंडों को पूरा करने वाली कैश रिप्लेसमेंट एजेंसी (सीआरए) को ही एटीएम में नकदी के प्रबंधन का जिम्मा देने की शर्त को बैंकों पर लागू किया जाना चाहिए। अप्रत्यक्ष रूप से एटीएम का प्रबंधन करने वाले मैनेज्ड सर्विस प्रोवाइडरों (एमएसपी) के मामले में भी इस अनिवार्यता को लागू किया जाना चाहिए।

आईबीए की रिपोर्ट में कहा गया है कि बैंकों की ओर से एटीएम का प्रबंधन करने वाली कंपनियों के लिए न्यूनतम 5 करोड़ रुपये का नेटवर्थ होने की शर्त निर्धारित है। इस काम के लिए नकदी की भारी व सतत जरूरत और जोखिमों को देखते हुए कैश रिप्लेसमेंट एजेंसियों के लिए ज्यादा बड़े नेटवर्थ का मानक तय करने की जरूरत है। ऐसा करके एटीएम में नकदी के प्रबंधन से जुड़े जोखिम को भी कम किया जा सकता है।
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कंपनियों के लिए वित्तीय मानदंडों के बारे में आईबीए ने अपनी रिपोर्ट सुझाव दिया है कि 5 करोड़ रुपये या उससे अधिक (25 करोड़ रुपये तक) के नेटवर्थ वाली कंपनियों को एटीएम में नकदी भरने के लिए अधिकतम 50 कैश वैनों के संचालन की अनुमति होनी चाहिए। इससे ऊपर 25 करोड़ से अधिक के नेटवर्थ वाली कंपनियों को 51 से 200 कैश वैनों के संचालन की अनुमति दी जानी चाहिए। इसी तरह 100 करोड़ रुपये या उससे ज्यादा नेटवर्थ की कंपनी को 500 कैश वैनों की इजाजत होनी चाहिए।

कैश लॉजिस्टिक कंपनी एसआईएस प्रोसीजर के एमडी और कैश लॉजिस्टिक्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (सीएलएआई) के अध्यक्ष रितुराज सिन्हा का कहना है कि कैश मैनेजमेंट के काम के लिए मानकों या दिशा-निर्देशों का निर्धारण गुणवत्ता को सुधारने और जोखिम कम करने में मददगार होगा। उन्होंने कहा कि कैश लॉजिस्टिक कंपनियां ऐसे नियमों का स्वागत करती हैं।

आईबीए ने अपनी रिपोर्ट में यह भी सुझाव दिया है कि बैंकों को एटीएम में नकदी के प्रबंधन में यह भी सुनिश्चित करना चाहिए कि एटीएम में डाले जाने वाले नोट रिजर्व बैंक की क्लीन नोट पॉलिसी के अनुरूप हों। इसके अलावा एटीएम ट्रांजेक्शन से जुड़े विवादों को कम करने के लिए बैंकों, एमएसपी और सीआरए को ऐसे मामलों का निपटारा एक हफ्ते के भीतर (साप्ताहिक आधार पर) करने की व्यवस्था करनी चाहिए। साथ ही इन विवादों का निपटारा आरबीआई की ओर से जारी दिशा-निर्देशों के मुताबिक किया जाना चाहिए।
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