भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर रघुराम राजन ने सभी राजनीतिक दलों को चेताया है कि वह वित्तीय सुधारों की अनदेखी न करें।
बुधवार को आरबीआई गवर्नर ने राजनीतिक दलों को स्पष्ट तौर पर संदेश दिया है कि अर्थव्यवस्था की मौजूदा चुनौतियां लोकसभा चुनावों के बाद बनने वाली नई सरकार को भी झेलनी पड़ेंगी।
ऐसे में जरूरी है कि अभी जो समय है, उसमें वित्तीय सुधारों के दिशा में राजनीतिक दल मिलकर सकारात्मक कदम उठाएं। ऐसा पार्टियों के साथ-साथ देश के लिए भी हितकर होगा।
दिल्ली इकोनॉमिक कॉनक्लेव में राजन ने कहा कि यदि मौजूदा समय में सभी राजनीतिक दल वित्तीय सुधारों को लागू करने में सहयोग नहीं करेंगे, तो आम चुनावों के बाद नई सरकार को कहीं ज्यादा कठिन चुनौतियां का सामना करना पड़ सकता है।
उन्होंने कहा कि यह बहुत खतरनाक सोच है कि सभी आर्थिक सुधार नई सरकार के हवाले कर दिए जाएं। ऐसा इसलिए हैं क्योंकि यह कोई जरूरी नहीं है कि नई सरकार बहुत स्थायी हो। ऐसे में उसके लिए कदम उठाना और चुनौतीपूर्ण होगा।
राजन के अनुसार डीजल की कीमतों को बाजार के अनुसार होना चाहिए। इसी तरह जो दूसरी सब्सिडी जारी है, उन पर भी कदम उठाना जरूरी है। इससे मिलने वाली पूंजी के जरिए कई विकासपरक चीजें की जा सकती हैं। इसका फायदा गरीब तबके तक भी पहुंचेगा।
उन्होंने कहा कि पिछले कुछ समय से अर्थव्यवस्था में सुधार के संकेत दिखे हैं, रुपया भी मजबूत हुआ है, पर इससे संतुष्ट होने की अभी जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा कि अभी भी रिजर्व बैंक का फोकस महंगाई को नियंत्रित करने पर है, पर यह भी बात है कि केवल मौद्रिक नीति से महंगाई को नियंत्रित नहीं किया जा सकता है।
जानबूझ कर कर्ज न चुकाने वालों पर होगी सख्ती
ऐसे लोग जो जानबूझ कर बैंकों के कर्ज नहीं चुका रहे हैं, उनके लिए आने वाले दिन काफी सख्त होने वाले हैं। इस बात के संकेत रिजर्व बैंक गवर्नर ने बुधवार को दिए हैं।
रघुराम राजन ने कहा है कि ऐसे लोगों के लिए कर्ज लेना आने वाले दिनों में मुश्किल होगा। राजन के अनुसार रिजर्व बैंक अगले हफ्ते इस मामले पर एक डिस्कसन पेपर जारी करेगा। इसमें प्रमुख जोर इस बात पर ही होगा कि जानबूज कर कर्ज न चुकाने वाले से कैसे वसूली की जाए, और उन पर लगाम लगाई जाए।