आर्थिक चुनौतियों के ट्रैक पर मुंह फाड़े खड़े रेलवे को भी अब मनरेगा की आवश्यकता पड़ गई है। रेलवे अपना कामकाज ग्रामीण विकास मंत्रालय के सहयोग से पूरा करेगा।
लोकसभा में रेल बजट पेश करते हुए रेल मंत्री पवन कुमार बंसल ने कहा कि रेल लाइनों के विस्तार और दोहरीकरण सहित अन्य कामकाज जिसमें मानव श्रम की जरूरत पड़ती है, वे सभी मनरेगा के तहत किए जा सकेंगे। ग्रामीण विकास मंत्रालय ने इसकी मंजूरी दे दी है।
रेल बजट में इसका ऐलान करते हुए बंसल ने कहा कि मनरेगा के जरिए रेल लाइन का विस्तार, छोटी लाइन को बड़ी लाइन में बदलने, पुरानी लाइनों के नवीनीकरण एवं नए स्टेशन बनाने सहित अन्य कामों को पूरा किया जा सकेगा। इससे कम खर्च में रेलवे अपनी लंबित परियोजनाओं को पूरा कर सकेगा।
मनरेगा के नियमों के तहत न सिर्फ पुरानी बल्कि रेलवे की नई परियोजनाओं को भी पूरा किया जा सकेगा। ग्रामीण विकास मंत्रालय के इस सहयोग से रेलवे का काम आसान तो होगा ही साथ ही ग्रामीण इलाकों में ज्यादा से ज्यादा रोजगार सृजित करने का मनरेगा का मकसद भी पूरा हो सकेगा।
रेलवे की माने तो जिस तरह से मंत्रालय के पास धन की कमी है, उससे नई परियोजनाओं के पूरा होने में दस वर्ष से भी अधिक का समय लग सकता है। यही नहीं परियोजनाओं में देरी से उसकी लागत में भी बढ़ोतरी होगी। रेलवे की परियोजनाओं में लगभग 30 फीसदी हिस्सा मजदूरी का होता है। लिहाजा मनरेगा के जरिए यह काम होने से रेलवे की योजना लागत घटेगी बल्कि परियोजनाओं को समय पर भी पूरा किया जा सकेगा।