कांग्रेस के उपाध्यक्ष बनने के बाद कॉरपोरेट जगत के साथ पहली दफा रु-ब-रु हुए राहुल गांधी ने देश के उद्यमियों को काफी प्रभावित किया है।
उन्होंने मौजूदा समस्याओं पर बेबाकी से बोलते हुए उद्योग जगत के समक्ष भविष्य को लेकर अपनी सोच पेश की। इसपर उद्योग जगत ने भी सरकार के साथ बेहतर तालमेल से आगे बढ़ने की बात पर जोर दिया।
भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) के अध्यक्ष आदि गोदरेज ने राहुल गांधी के भाषण की तारीफ करते हुए कहा कि उनकी सोच काफी अच्छी है। हमें एक साथ मिलकर अधिक से अधिक प्रगति के लिए कार्य करना चाहिए।
उन्होंने राहुल के भाषण में महिलाओं के सशक्तीकरण और करोड़ों लोगों की आवाज बुलंद करने की बात को भी सराहा। जबकि सीआईआई के नामित अध्यक्ष एस. गोपालकृष्णन ने कहा कि औद्योगिक समुदाय के साथ राहुल गांधी का यह पहला कार्यक्रम उम्मीद के मुताबिक रहा है। वे उद्योग जगत के उम्मीदों पर खरा उतरे हैं। उन्हें तमाम मुद्दों पर विस्तार में चर्चा की है। इसे उद्योग और सरकार के बीच बेहतर तालमेल के रूप में भी देखा जा सकता है।
प्रख्यात उद्यमी राहुल बजाज ने कहा कि भले ही लोग कहते हैं कि राहुल गांधी को अनुभव की कमी है और वे जनता से बात नहीं करते हैं। लेकिन मैं उनकी बातों और खुले विचारों से प्रभावित हूं। उन्होंने उद्योग जगत को अपनी स्पष्टवादिता से प्रभावित किया है।
क्रेडाई के ललित कुमार जैन का कहना है कि राहुल गांधी के समावेशी विकास के विचार से उम्मीद है कि भविष्य में इसी के अनुरूप कार्य किए जाएंगे। राहुल गांधी ने लाखों आमजन को सशक्त करने और उनकी आवाज सुनने की बात की है जो कि स्वागत योग्य है। हालांकि सीआईआई के समारोह में मौजूद कई उद्यमियों ने कहा कि बेशक राहुल गांधी ने तमाम समस्याओं को पेश किया है लेकिन इसका हल निकालने का रास्ता भी उन्हें सरल शब्दों में बताना चाहिए था।
उद्यमियों ने दुनिया में बढ़ाई भारत की प्रतिष्ठा: राहुल
भारतीय उद्यमियों की प्रशंसा करते हुए कांग्रेस के उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने कहा कि उद्यमियों के कारण ही दुनिया में भारत की प्रतिष्ठा बढ़ी है। देश की ऊर्जा उद्यमियों के माध्यम से दुनिया भर में जा रही है। भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) को संबोधित करते हुए उन्होंने शोध और शिक्षा को बाजार से जोड़ने की बात भी कही।
उन्होंने कहा कि भारत चीन से ज्यादा पावरफुल है। हम और भी ज्यादा ताकतवर बन सकते हैं। उन्होंने देश की अप्रचलित शिक्षा प्रणाली पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि क्यों लोग देश में पढ़ने के बजाए हावर्ड जाना चाहते हैं जबकि देश में ही बेहतर शिक्षा प्राप्त की जा सकती है।