वित्त मंत्रालय के सुझाव के बावजूद श्रम मंत्रालय ने कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) को उसके करीब पांच लाख करोड़ रुपये के विशाल कोष के एक हिस्से को शेयर बाजार में लगाने की अनुमति नहीं दी है। मंत्रालय ने हालांकि ईपीएफओ के लिए निवेश के नियमों में कई अन्य तरह की ढील दी है।
श्रम मंत्रालय की ओर से जारी हालिया अधिसूचना में कहा गया है कि ईपीएफओ अपने कोष का 55 फीसदी हिस्सा बैंकों, वित्तीय संस्थानों और अन्य निकायों के ऋण पत्रों में निवेश कर सकता है।
जुलाई 2003 की अधिसूचना में ईपीएफओ को कोष का 30 फीसदी हिस्सा सरकारी कंपनियों के ऋण पत्रों में निवेश करने की अनुमति दी गई थी। यह अधिसूचना ईपीएफओ द्वारा नियमित निजी पीएफ ट्रस्टों पर लागू नहीं होगी। मंत्रालय इनके लिए अलग से अधिसूचना जारी कर सकता है। देश में करीब 2700 निजी ट्रस्ट हैं जिनके पास करीब दो लाख करोड़ रुपये का कोष है।
वित्त मंत्रालय ज्यादा रिटर्न हासिल करने के लिए ईपीएफओ कोष को शेयर बाजार में लगाने की वकालत करता रहा है, लेकिन ईपीएफओ संघों के विरोध के कारण ऐसा संभव नहीं कर सका है। संघों का कहना है शेयर बाजार में निवेश अस्थिर है।
वित्त मंत्रालय ने साल 2005 और 2008 में ईपीएफओ कोष के एक हिस्से को शेयर बाजार में लगाने की बात कही थी। ताजा अधिसूचना में ईपीएफ को कोष का पांच फीसदी हिस्सा सेबी द्वारा नियमित म्यूचुअल फंडों, इक्विटी लिंक्ड स्कीमों आदि में लगाने का सुझाव दिया गया है। देश में ईपीएफओ के पांच करोड़ से अधिक खाताधारक हैं और साल 2012-13 में इसने 8.5 फीसदी ब्याज दिया था।