कालेधन मामले में स्विट्जरलैंड के ढीले रवैये से परेशान भारत सरकार ने आर्थिक संबंधों के पटरी से उतरने की चेतावनी दे डाली है। वित्त मंत्री पी. चिदंबरम द्वारा स्विस वित्त मंत्री को लिखे गए पत्र के अनुसार भारत लगातार ऐसे लोगों के बारे में जानकारी मांग रहा है, जिनपर कर चोरी का मामला भारत में सामने आया है और उनके स्विट्जरलैंड के एचएसबीसी बैंक में खाते हैं।
भारत सरकार का आरोप है कि इस संबंध में स्विटजरलैंड सरकार से समझौता होने के बावजूद वह उचित सहयोग नहीं कर रही है। ऐसे में वित्त मंत्री ने अपने पत्र में कड़े शब्दों में कहा है कि स्विटजरलैंड सरकार के इस रवैये से दोनों देशों के आर्थिक संबंधों पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है।
जल्द खुलेंगे और राज
वित्त मंत्री पी. चिदंबरम द्वारा 29 अप्रैल को स्विट्जरलैंड के वित्त मंत्री इवलाइन विडमर स्कलंफ को लिखे पत्र में कहा गया है कि डबल टैक्सेशन अवायडेंस कनवेंशन समझौते के तहत दोनों देशों के बीच आर्थिक संबंधों को मजबूत करने के लिए यह प्रावधान है कि वह कर संबंधी सूचनाओं का आदान-प्रदान करें।
ऐसे में स्विट्जरलैंड सरकार को इस समझौते का सम्मान करना चाहिए। चिदंबरम ने यह पत्र स्विट्जरलैंड के वित्त मंत्री द्वारा 7 अप्रैल को भेजे गए जवाब के प्रत्युत्तर में लिखा है, जिसमें स्विट्जरलैंड सरकार ने भारत सरकार को कहा था कि वह सूचनाओं को साझा नहीं कर सकती है।
भारत सरकार का कहना है कि इस मामले को वह अंतरराष्ट्रीय मंच पर उठाते रहेंगे। पूरे मामले पर भारत सरकार ने स्विटरलैंड सरकार के साथ जल्द बैठक की उम्मीद जताई है।
समझौते के बाद भी नहीं मिल रहा है सहयोग
भारत के लगातार मांग और अंतरराष्ट्रीय दबाव के बाद स्विट्जरलैंड सरकार ने साल 2011 में बैंकिंग सीक्रेसी कानून में बदलाव की बात कही थी। भारत सरकार के साथ संशोधित कर संधि की गई थी। दोनों देशों के बीच हुए समझौते का उद्देश्य यह था कि काले धन को लेकर ज्यादा से ज्यादा सूचनाएं प्राप्त की जा सकें।
पी. चिदंबरम ने चार महीने में तीसरी बार लिखा पत्र
भारत सरकार एचएसबीसी की स्विट्जरलैंड शाखा से ऐसे भारतीयों के नाम और दूसरे ब्यौरे जानना चाह रही हैं, जिन पर कर चोरी का मामला भारत में चल रहा है।
स्विट्जरलैंड शुरू से अपने मजबूत बैंकिंग सीक्रेसी कानून के कारण भारत सहित दूसरे विदेशी नागरिकों के लिए कालाधन सुरक्षित रखने का प्रमुख केंद्र रहा है।
भारत सरकार को फ्रांस सरकार से किए गए समझौते के बाद एचएसबीसी में भारतीय नागरिकों के खातों की जानकारी मिली है। इसके आधार पर ही स्विट्जरलैंड सरकार से ऐसा ही ब्योरा मांगा जा रहा है।