भारी डूबते कर्ज और कई सारी अनियमिताओं का सामना कर रहे सरकारी बैंक यूनाइटेड बैंक ऑफ इंडिया की सीएमडी अर्चना भार्गव ने स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (वीआरएस) ले ली है। भार्गव के आवेदन को वित्त मंत्रालय ने भी स्वीकार कर लिया है। नए सीएमडी की नियुक्ति तक बैंक के मौजूदा दो कार्यकारी अधिकारी कामकाज संभालेंगे।
करीब 8,546 करोड़ रुपये की गैर निष्पादित संपत्तियों (एनपीए) से जूझ रहे बैंक में अनियमिता सामने आने के बाद रिजर्व बैंक ने जहां यूबीआई का फॉरेंसिक ऑडिट कराया है। साथ ही उसके नए कर्ज देने पर भी लगाम कस दी गई है।
इन परिस्थितियों में शायद अर्चना भार्गव किसी सरकारी बैंक की पहली सीएमडी हैं जिन्होंने वीआरएस लिया है। उनका अचानक उठाया गया कदम तब और संदेह खड़ा कर रहा है, जब वित्त मंत्रालय ने एक दिन के अंदर ही उनके आवेदन को स्वीकार कर लिया है। भार्गव ने ऐसे समय में वीआरएस लिया है, जब बैंक की वित्तीय स्थिति काफी खराब है। बैंक का ग्रॉस एनपीए 8,546 करोड़ रुपये पहुंच गया है। बैंक का कुल एनपीए 10.8 फीसदी हो गया है।
इस्तीफा देने के पीछे असली वजह क्या?
सूत्रों के अनुसार अर्चना भार्गव ने वीआरएस का आवेदन बृहस्पतिवार को ही कर दिया था। वित्त मंत्रालय ने शुक्रवार को इसे स्वीकार करने की पुष्टि कर दी है।
वीआरएस की अधिकारिक वजह भार्गव के स्वास्थ्य समस्या बताई गई है। वित्त मंत्रालय और बैंकिंग इंडस्ट्री के सूत्रों की मानें, तो सरकार यूनाइटेड बैंक के सीएमडी के रूप में भार्गव के कामकाज के तरीके से संतुष्ट नहीं थी, जिसे देखते हुए उन्हें यह कदम उठाना पड़ा है।
इनफोसिस पर फोड़ा था ठीकरा
यूनाइटेड बैंक ने बुधवार को एनपीए में बढ़ोतरी के लिए इनफोसिस के सॉफ्टवेयर फिनेकल को जिम्मेदार ठहराया था। लेकिन, इनफोसिस ने यूनाइटेड बैंक के आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। इनफोसिस से पलटवार के बाद यूनाइटेड बैंक ने अपना आरोप भी वापस ले लिया था।