मोदी सरकार बनने के बाद पेश हुई पहली मौद्रिक नीति में ईएमआई पर राहत नहीं मिली है। इसके लिए इंतजार थोड़ा और लंबा हो गया है। भारतीय रिजर्व बैंक ने मंगलवार को पेश मौद्रिक नीति में उम्मीदों के अनुरूप रेपो रेट और सीआरआर में कोई बदलाव नहीं किया है।
हालांकि, आरबीआई गवर्नर रघुराम राजन ने मौद्रिक नीति में यह संकेत दे दिए हैं कि अगर आगामी बजट में मोदी सरकार अर्थव्यवस्था में सुधार और महंगाई पर नियंत्रण के लिए बेहतर रोडमैप पेश करती है, तो आरबीआई कर्ज सस्ता कर सकता है।
रिजर्व बैंक के अनुसार अभी महंगाई और ग्रोथ रेट बेहतर स्थिति में हैं। ऐसे में मोदी सरकार का बजट आम आदमी से लेकर उद्योग जगत के लिए सस्ते कर्ज की राह खोल सकता है।
रिजर्व बैंक ने नकद आरक्षित अनुपात (सीआरआर) को 4.0 फीसदी और रेपो रेट को 8.0 फीसदी पर बरकरार रखा है। रिजर्व बैंक ने एसएलआर (स्टेच्युरी लिक्विटी रेशियो) को 0.50 फीसदी घटाकर 22.5 फीसदी कर दिया है। इस कदम से बैंकों की नकदी उपलब्धता बढ़ेगी, जिससे वह ज्यादा कर्ज दे सकेंगे।
भविष्य को ध्यान में रखते हुए लिया फैसला?
आरबीआई गवर्नर राजन ने द्विमासिक मौद्रिक नीति पेश करते हुए कहा है कि स्पष्ट चुनाव परिणामों के आने से माहौल में जिस तरह सुधार हुआ है, उसे देखते हुए ऐसी उम्मीद है कि सरकार के तरफ से एक वृहद नीतिगत फैसले होंगे। जिससे कि मांग में तेजी होने के साथ-साथ ग्रोथ में सुधार होगा।
रिजर्व बैंक के अनुसार उपभोक्ता महंगाई दर अप्रैल और मई में बढ़ी है। साथ ही अलनीनो की आशंका को देखते हुए इस बात की जरूरत है कि सरकार की तरफ से आने वाले दिनों में राजकोषीय प्रबंधन के साथ-साथ महंगाई पर नियंत्रण के लिए उठाए कदमों को देखा जाए, जिसके आधार पर आगे की दिशा तय हो सके गी
इसे देखते हुए रिजर्व बैंक ने प्रमुख दरों में किसी तरह का बदलाव नहीं किया गया है। आरबीआई के कदम पर वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा है कि रिजर्व बैंक ने अपनी नीति में कैलिब्रेटेड रुख को अपनाया है। आरबीआई के कदम पर रिलायंस कामर्शियल फाइनेंस के सीईओ केवी श्रीनिवासन का मानना है कि बैंकों के पास नकदी बढ़ने से वह अब कॉरपोरेट को ज्यादा कर्ज दे सकेंगे।
किसने कहा क्या?
अरुधंती भट्टाचार्य, चेयरपर्सन, भारतीय स्टेट बैंक के मुताबिक आरबीआई का कदम उम्मीदों के अनुरूप है। एसएलआर में कटौती से बैंकों की नकदी बढ़ेगी, पर इस कदम से तुरंत कर्ज सस्ता होने की संभावना नहीं है।
चंदा कोचर, एमडी एवं सीईओ, आईसीआईसीआई बैंक ने कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में आरबीआई ने उम्मीदों के अनुसार ही कदम उठाया है। बैंकों को एसएलआर में कटौती से नकदी की उपलब्धता बढ़ेगी।
मौद्रिक समीक्षा की प्रमुख बातें
- सीआरआर 4.0 फीसदी और रेपो रेट 8.0 फीसदी पर बरकरार
- एसएलआर 0.50 फीसदी घटाकर 22.5 फीसदी
- उपभोक्ता महंगाई दर 2015 में 8 फीसदी और साल 2016 में 6 फीसदी रहने का अनुमान
- वित्त वर्ष 2014-15 में 5-6 फीसदी रहने का अनुमान
- अलनीनो की आशंका को देखते हुए मानसून प्रतिकूल होने का डर
- मोदी सरकार से महंगाई को नियंत्रित करने के कदम और राजकोषीय प्रबंधन की उम्मीद
- विदेश में अब भारतीय 1,25,000 डॉलर भेज सकेंगे, अभी 75 हजार डालर भेजने की थी अनुमति
- विदेश यात्रा पर 25,000 रुपये ले जा सकेंगे, अभी 10 हजार रुपये थी सीमा
- एक्सपोर्ट क्रेडिट फाइनेंस की सीमा 50 फीसदी से घटाकर 32 फीसदी किया