निजी बैंकों के लाइसेंस के लिए रिजर्व बैंक ने नियम-शर्तें जारी कर दी हैं। आरबीआई ने स्पष्ट किया है किसी वित्तीय मामले में फंसी या विवादित निजी कंपनी को बैंकिंग लाइसेंस नहीं दिया जाए।
आरबीआई के डिप्टी जनरल मैनेजर आरआर सिन्हा द्वारा जारी अधिसूचना के मुताबिक नए बैंकिंग लाइसेंस लेकर खोली जाने वाली कुल बैंक शाखाओं में 25 फीसदी शाखाएं ऐसे ग्रामीण क्षेत्रों में खोलनी होंगी, जहां की आबादी दस हजार या उससे ज्यादा होगी।
विभिन्न प्रवर्तन और वित्तीय अपराधों से संबंधित जांच एजेंसियों से एप्रूवल भी लिया जाएगा। वहीं निजी बैंक प्रथम पांच वर्षों में 49 फीसदी से अधिक विदेशी निवेश स्वीकार नहीं कर सकेंगे।
अधिसूचना के मुताबिक निजी क्षेत्र के बैंकिंग लाइसेंस के लिए वही कंपनियां अधिकृत होंगी, जो पब्लिक सेक्टर, एनबीएफसी या प्राइवेट सेक्टर से संबंधित होंगी।
इसके लिए उन्हें नॉन ऑपरेटिंग फाइनेंशियल होल्डिंग कंपनी बनानी होगी। साथ ही उनकी वित्तीय साख अच्छी हो और उनके खिलाफ किसी प्रकार के आर्थिक अपराध का मामला या कार्रवाई न चल रही हो।
अधिसूचना के तहत वोटिंग राइट्स के लिए न्यूनतम पूंजी पांच बिलियन रुपए यानी पचास करोड़ रुपए होगी। बैंक का गठन होने के तीन वर्ष के बाद बैंक को शेयर मार्केट में लिस्टिंग करानी होगी।
शुरुआत में होल्डिंग कंपनी के पास 40 प्रतिशत वोटिंग शेयर होंगे, जिसे बैंक के गठन के 12 वर्षों में घटाकर 15 फीसदी तक लाना होगा। इन बैंकों को आरबीआई और अन्य रेगुलेटरी अथॉरिटी द्वारा बनाए गए कानूनों के तहत काम करना होगा।
यह भी शर्त है कि बैंक के 50 फीसदी निदेशक स्वतंत्र होंगे। निजी बैंक अपने प्रमोटर ग्रुप या मूल कंपनी को न तो किसी प्रकार का फाइनेंस कर सकेगा और न ही मूल कंपनी बैंक के शेयर या डिबेंचर्स में पैसा लगा सकेगी।
इच्छुक समूहों को एक जुलाई तक आरबीआई में आवेदन करना होगा। आरबीआई अपने स्तर से स्क्रीनिंग करने के बाद प्रपोजल एक हाई लेवल एडवाइजरी कमेटी को देगा। उसकी सिफारिशों के आधार पर लाइसेंस देने पर निर्णय लिया जाएगा।