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सिविल सर्विसेज परीक्षा में भारतीय भाषाओं को धक्का

Sat, 09 Mar 2013 01:23 AM IST
आफताब अजमत/देहरादून
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सिविल सर्विस परीक्षा देने की तैयारी कर रहे हिंदी और भारतीय भाषाओं की जानकारी रखने वाले युवाओं के लिए बुरी खबर है।
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संघ लोक सेवा आयोग की परीक्षा पैटर्न में बदलाव कर इस बार हिंदी समेत भारतीय भाषाओं का अनिवार्य पेपर समाप्त कर दिया गया है। जबकि अंग्रेजी का पेपर बरकरार रखा गया है।

संघ लोक सेवा आयोग ने इस परिवर्तन को बीते 5 मार्च को वर्ष 2013 की सिविल सर्विसेज परीक्षा के कार्यक्रम के साथ नोटिफाई भी कर दिया है। इससे हिंदी और दूसरे भाषा पर पकड़ रखने वाले युवा चिंतित नजर आ रहे हैं।
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परीक्षा 26 मई को
सिविल सेवाओं के लिए प्रारंभिक परीक्षा इस वर्ष 26 मई को होगी। इसके लिए ऑनलाइन आवेदन देने की अंतिम तिथि चार अप्रैल है।

9 के बजाए 7 पेपर
संघ लोक सेवा आयोग ने इसी साल सिविल सेवा की परीक्षा पैटर्न में बदलाव किए हैं। जहां पहले मुख्य परीक्षा में 9 पेपर होते थे, अब उनकी संख्या घटाकर 7 कर दी गई है। सबसे खास बात यह है कि इस बदलाव में हिंदी का 300 अंकों का पेपर भी खत्म कर दिया गया है।

मुख्य परीक्षा के पुराने पैटर्न के तहत पहले 300 अंकों की अंग्रेजी, 300 अंकों की भारतीय भाषाओं और 200 अंकों की निबंध की परीक्षा होती थी। नए बदलावों के तहत अब केवल अंग्रेजी की सूरत बदलकर ‘इंगलिश कंप्रेहेंसिव एंड इंगलिश प्रेसीज’ का 100 अंकों का और निबंध की 200 अंकों की परीक्षा होगी। इस वजह से हिंदी में पकड़ रखने वाले छात्रों को अपनी अंग्रेजी में जबर्दस्त सुधार करना पड़ेगा।

मानवता पर जोर
बदले हुए पैटर्न के तहत इस बार मुख्य परीक्षा में सामान्य अध्ययन के चार प्रश्न पत्र रखे गए हैं। प्रत्येक के लिए 250 अंक निर्धारित हैं। इनमें से चौथा प्रश्नपत्र पहली बार पैटर्न में शामिल किया गया है।

इस प्रश्न पत्र का नाम ‘इथिक्स, इंटिग्रिटी एंड एप्टीट्यूड’ रखा गया है। इसके तहत युवाओं को मानव मूल्य, इमोशनल इंटेलीजेंस, एटीट्यूड और एप्टीट्यूड के तहत मार्टिन लूथ किंग, महात्मा गांधी, स्वामी विवेकानंद, अब्राहम लिंकन, मदर टेरेसा, डेविड ह्यूम, सुकरात और अरस्तू जैसी हस्तियों के जीवनवादी सिद्घांतों के आधार पर तैयारी करनी होगी।
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बदले पैटर्न को रटने के बजाए समझने की ओर बदलाव के नजरिए से देखा जा सकता है। मुख्य परीक्षा नवंबर में होगी। बदले हुए पैटर्न के तहत तैयारी करने में थोड़ा मुश्किल होगी।
-जीएस रावत, निदेशक, रावत आईएएस एकेडमी
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