उन्होंने कहा कि सरकार और भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) दोनों ही टैपरिंग को लेकर सजग हैं। वित्तीय स्थिरता के लिए सभी जरूरी कदम उठाए जाएंगे।
बीती देर रात फेड के फैसले को अगले माह से अमल में लाने की घोषणा के बाद बृहस्पतिवार को घरेलू शेयर बाजार इस खबर के चलते शुरुआती कारोबार में भारी दबाव में आ गए। रुपये पर भी दबाव देखा गया।
बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) के सेंसेक्स में शुुरुआती कारोबार में 225 अंक की गिरावट देखी गई, जबकि रुपया 33 पैसे गिरकर 62.75 रुपये प्रति डॉलर के भाव पर देखा गया। बाजार में मची अफरा-तफरी के बीच वित्त मंत्रालय ने बयान जारी कर इसे संभालने की कोशिश की।
बयान में कहा गया है कि फेडरल रिवर्ज का यह फैसला पूर्व-निर्धारित था। इसलिए भारतीय बाजार के लिए इसमें हैरानी या परेशानी की कोई बात नहीं है। फेड द्वारा बांड खरीद में कटौती का जिक्र करते हुए वित्त मंत्रालय ने कहा है कि यह सच है कि 65 अरब डॉलर कोई छोटी रकम नहीं है, पर इससे कहीं ज्यादा नकदी ग्लोबल बाजार में डाली जाती रहेगी। इसलिए फेड की कटौती से बहुत ज्यादा घबराने की जरूरत नहीं है।
वित्त मंत्री ने कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था काफी मजबूत है और ऐसी स्थितियों का सामना करने के लिए अच्छी तरह से तैयार है।
गौरतलब है कि अमेरिका के केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व ने आर्थिक सुस्ती के बाद अमेरिकी अर्थव्यवस्था में रिकवरी को देखते हुए बांड खरीद में चरणबद्ध कटौती के फैसले को अगले माह से लागू करने की घोषण की है।
इसके तहत फेड हर महीने अब केवल 65 अरब डॉलर के सरकारी बांडों की खरीद करेगा। फेड यह खरीद मंदी से जूझ रही अमेरिकी अर्थव्यवस्था को नकदी उपलब्ध करा कर सहारा देने के लिए करता है।