फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

कोबरापोस्ट खुलासे के बाद वित्त मंत्रालय सख्त

Mon, 06 May 2013 09:56 PM IST
नई दिल्ली/ब्यूरो
विज्ञापन
विज्ञापन
ऑनलाइन पत्रिका कोबरापोस्ट द्वारा मनी लांड्रिंग के किए गए खुलासे के बाद अब वित्त मंत्रालय सक्रिय हो गया है।
विज्ञापन


इसके तहत मंत्रालय ने सभी सार्वजनिक बैंकों के प्रमुखों और भारतीय जीवन बीमा के प्रमुख को पत्र लिखकर तुरंत जांच शुरू करने के निर्देश दिए हैं। उधर, बीमा नियामक इरडा ने भी पूरे मामले की जांच करने की बात कही है।

सोमवार को देर शाम वित्त मंत्रालय में वित्तीय सेवा मामलों के विभाग के सचिव राजीव टकरू ने सार्वजनिक बैंकों और एलआईसी प्रमुख को पत्र लिखा है कि वह अपने स्तर पर जांच करें।
विज्ञापन


यहीं नहीं यदि आरोपी कर्मचारी के काम पर बने रहने से किसी तरह का कोई जांच पर असर पड़ता है, तो उसे बैंक पद से अस्थायी रूप से हटा भी सकते हैं। या फिर कर्मचारी को छुट्टी पर भी जाने के निर्देश दे सकते हैं।

इसी तरह बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण (इरडा) ने भी कहा है कि वह पूरे मामले की जांच कर रहा है।

केवाईसी नियमों की अनदेखी
देश के सबसे बड़े बैंक सहित 23 बैंकों और बीमा कंपनियों पर मनी लांड्रिंग सहित केवाईसी नियमों की अनदेखी सहित अन्य आरोप लगे हैं।

आरोपों पर स्टेट बैंक के चेयरमैन प्रतीप चौधरी ने कहा है कि जहां तक फौरी तौर पर समझ में आ रहा है, इसमें कोई गंभीर बात नहीं है। एसबीआई में मनीलांड्रिंग और केवाईसी नियमों के पालन के लिए सख्त प्रणाली है।

इसके अलावा जयपुर में स्थित एक सेल संदेहास्पद लेन-देन पर भी नजर रखता है। ऐसे में मैं मनीलांड्रिंग के आरोप का खंडन करता हूं।  

वहीं, इन आरोपों पर बैंक ऑफ बड़ौदा द्वारा जारी किए गए बयान के अनुसार वह पूरे मामले की जांच कर रहा है। जहां तक केवाईसी नियमों की अनदेखी और मनी लांड्रिंग का आरोप है, तो बैंक की निगरानी प्रणाली इस तरह की गतिविधियों को पकड़ने में काफी सक्षम है।

इस मामले पर रिलायंस कैपिटल द्वारा जारी बयान के अनुसार वह अपने ऊपर लगे आरोपों का खंडन करती है। कंपनी की मनीलांड्रिंग गतिविधियों में कोई लिप्तता नहीं है। इसके अलावा कंपनी सतत प्रक्रिया की तहत भी अपने स्तर जांच करती रहती है।
विज्ञापन


क्या हैं प्रमुख आरोप
1. वित्तीय संस्थान मनी लांड्रिंग को उत्पाद के रूप में बेचते हैं।
2. आरोपी बैंकों में बीमा के लिए जुटाई गई ज्यादातर राशि कालेधन के रूप में है।
3. भारतीय दंड संहिता और एंटी मनी लांड्रिंग एक्ट का हो रहा है उल्लंघन।
4. रिजर्व बैंक और वित्त मंत्रालय की भूमिका सख्त नहीं।

किन पर लगे हैं आरोप
बैंक: एसबीआई, पीएनबी, बीओबी, ओबीसी, केनरा, इंडियन बैंक, आईओबी, सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया, आईडीबीआई, इलाहाबाद बैंक, कॉरपोरेशन बैंक, देना बैंक, येस बैंक, धनलक्ष्मी बैंक, डीसीबी बैंक, फेडरल बैंक।

बीमा कंपनियां
एलआईसी, रिलायंस लाइफ इंश्योरेंस, बिड़ला सनलाइफ, टाटा एआईजी।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें