जापान की ब्रोकरेज कंपनी नोमुरा का कहना है कि मौजूदा वित्त वर्ष में राजकोषीय घाटा सकल घरेलू उत्पाद जीडीपी के 4.1 फीसदी के स्तर पर रखने का बजट लक्ष्य हासिल करना चुनौतीपूर्ण काम है।
नोमुरा के मुताबिक इस वर्ष राजस्व संग्रह कम होने के कारण भारत का राजकोषीय अंकगणित कठिन हो गया है। सरकार आने वाले माह में खर्च में बड़े पैमाने पर कटौती करेगी।
कंट्रोलर जनरल ऑफ अकाउंट्स द्वारा बुधवार को जारी किए गए आंकड़ों के मुताबिक अप्रैल-नवंबर अवधि में भारत का राजकोषीय घाटा 2014-15 के अनुमान का 98.9 फीसदी था। ऐसा प्रमुख रूप से राजस्व संग्रह कम होने के कारण हुआ है।
नोमुरा में इंडिया इकोनॉमिस्ट और एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर सोनल वर्मा ने एक रिसर्च नोट में कहा है कि पिछले वर्ष भी सरकार का राजकोषीय वित्त समान स्थिति में था। वर्मा ने कहा कि अंतर यह है कि पिछले वर्ष खर्च अधिक था और राजस्व संग्रह कम था।
लेकिन इस वर्ष की कठिन राजकोषीय स्थिति के लिए सिर्फ राजस्व कस संग्रह कम होना ही जिम्मेदार है। पिछले वर्ष की समान अवधि में राजकोषीय घाटा वर्ष के लक्ष्य का 93.9 फीसदी था। राजकोषीय घाटा सरकार के खर्च और राजस्व में अंतर को कहते हैं।
वर्मा का का कहना है कि मेरी राय है कि अगर विनिवेश में तेजी आती है तब भी जीडीपी के 4.1 फीसदी राजकोषीय घाटे के लक्ष्य को हासिल करने के लिए खर्च में कटौती, भुगतान में देरी और अगले तीन माह में सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों