चुनावों में मिली करारी हार के बाद, सरकार ने ऐसे किसी कदमों को उठाने की आशंका को दर किनार कर दिया है, जिससे अर्थव्यवस्था की सेहत बिगड़ जाए।
बुधवार को दिल्ली इकोनॉमिक कॉनक्लेव में वित्त मंत्री ने कहा सरकार वित्तीय सेहत में सुधार के लिए उठाए जा रहे कदमों से पीछे नहीं हटेगी।
चार राज्यों के चुनाव परिणा आने के बाद इस बात की आशंका जताई जा रही थी, कि सरकार ऐसे कदम उठा सकती है, जिससे उसका घाटा और बढ़ सकता है। यानी कि आय के मुकाबेल लोक-लुभावन योजनाओं के जरिए सरकारी खर्च कहीं ज्यादा बढ़ सकता है। बुधवार को वित्त मंत्री ने ऐसी आशंका को दूर तो किया है, पर उन्होंने यह भी माना है कि महंगाई चुनावों में हार की एक प्रमुख वजह रही है।
सम्मेलन के दौरान चिदंबरम ने कहा कि सरकार वित्तीय सेहत को मजबूत करने के लिए तय रोडमैप से पीछे नहीं हटने वाली है। उन्होंने कहा कि राजकोषीय घाटे को कम करने के लिए सरकार अपने रोडमैप पर ही चलेगी।
उन्होंने कहा कि इसी के तहत हमें साल 2016-17 तक राजकोषीय घाटे को सकल घरेलू उत्पाद के तीन फीसदी स्तर तक लाना है। वित्त मंत्री ने कहा कि सरकार की ओर से मैं यह आश्वासन देता हूं कि इसके लिए सरकार कोई समझौता नहीं करेगी। उन्होंने कहा कि इसी तरह सरकार हर हालत में चालू वित्त वर्ष के लिए राजस्व घाटे को 4.8 फीसदी के स्तर के लक्ष्य को सरकार पूरा करेगी।
हालांकि वित्त मंत्री ने सरकार के इरादों को साफ करते हुए यह भी कहा कि कई बार राजनीतिक मजबूरियों के वजह से कई फैसले अटक जाते हैं। उन्होंने कहा कि डीटीसी बिल, बीमा बिल, जीएसटी जैसे वित्तीय सुधार के कदमों से भारतीय अर्थव्यवस्था को फायदा मिलेगा। उन्होंने कहा कि इस तरह के कदमों पर आम सहमति बनाने के लिए लंबी कवायद करनी पड़ती है। पर राजनीतिक मजबूरियों से यह कवायद असफल भी हो जाती है।
इस मौके पर वित्त मंत्रालय में आर्थिक मामलों के सचिव अरविंद मायाराम ने कहा कि अर्थव्यवस्था के लिए वैश्विक अर्थव्यस्थाओं से जुड़ने की चुनौतियां हैं। सरकार वित्तीय सुधारों की दिशा में उठाए जा रहे कदमों को तय रोडमैप के साथ जारी के लिए प्रतिबद्ध है।